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Monday, 26 February 2018

जयपुर:-स्वास्थ्य विभाग के पीसीटीएस के आंकड़ो के अनुसार 0 से 6 वर्ष के बालिका लिंगानुपात में 34 अंको की बढोतरी


राज्य के छ: टॉप जिलों में हनुमानगढ, गंगानगर,सीकर, धौलपुर,झुंझुनूं व करौली , हनुमानगढ में 75 अंको की बढ़ोतरी

जयपुर । राजस्थान में वर्ष 2012-13 से जनवरी 2018 तक जन्मे बच्चों का लिंगानुपात का आंकलन किया गया। जिसके अनुसार 0 से 6 वर्ष तक के जीवित बच्चे 79 लाख 26 हजार 891 है, जिनमें से 41 लाख 25 हजार 80 लडक़े व 38 लाख 01 हजार 811 लड़किया है। इन आंकड़ो के अनुसार गत 6 वर्ष में जन्मे बच्चों का शिशु लिंगानुपात 922 है जो कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 0 से 6 वर्ष के शिशु लिंगानुपात में 888 अंको से 34 अंको की बढोतरी हुई है। राजस्थान के 4 जिलों में शिशु लिंगानुपात में कमी आई है जबकि 29 जिलों में वृद्धि हुई है। सबसे बेहतरीन वृद्धि हनुमानगढ,गंगानगर, सीकर ,धौलपुर,झुंझुनूं व करौली में हुई है। 

सामाजिक कार्यकर्ता राजन चौधरी द्वारा राजस्थान सरकार में स्वास्थ्य विभाग में रिपोर्ट होने वाले पीसीटीएस के 6 वर्षो के आंकड़ो का अध्यन्न किया गया। अध्यन्न में सामने आया कि गत 6 वर्ष में इन आकड़ो के आधार पर 3 लाख 6 हजार 600 बेटियों ने अधिक जन्म लिया है। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ो के अनुसार। चौधरी ने बताया कि जनगणना 2011 के आकड़ो में 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों में 6 लाख 28 हजार 848 बेटिया कम पैदा हुई थी। अर्थात 1000 लडक़ो पर 888 बालिका लिंगानुपात रहा। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 287 बेटियां प्रतिदिन कम पैदा होती थी जबकि वर्तमान के आंकड़ो के अनुसार 147 बेटिया प्रतिदिन कम पैदा हो रही है,अर्थात वर्ष 2012 अप्रैल के आंकड़ो के अनुसार 140 बेटियों ने प्रतिदिन ज्यादा जन्म लिया है। जिसके कारण गत 6 वर्षो में 3 लाख 6 हजार 600 बेटियां अधिक जन्म ले पाई है। 

सामाजिक कार्यकर्ता राजन चौधरी ने बताया कि अपै्रल 2012 से जनवरी 2018 तक 0 से 6 वर्ष तक के 83 लाख 3 हजार 627 बच्चों ने जन्म लिया जिनमें से 43 लाख 5 हजार 929 लडक़े तथा 39 हजार 97 हजार 698 लड़किया जन्मी है। चौधरी ने बताया कि इन कुल जन्म लेने वाले बच्चों में से 1 लाख 80 हजार 849 लडक़े व 1 लाख 95 हजार 887 लड़कियों की 5 वर्ष से पूर्व ही मृत्यु हो चूकी। चौधरी ने बताया कि 5 वर्ष तक की उम्र में मृत्यु के शिकार होने वाले 3 लाख 76 हजार 736 बच्चों में 15 हजार 38 लड़किया मृत्यु की शिकार अधिक हुई जो कि बालिका लिंगानुपात में कमी की दृष्टि से बहुत बड़ी संख्या है। राजन चौधरी के अध्ययन के अनुसार राजस्थान राज्य में पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन व जन जागरूकता कार्यक्रमों से 34 अंको की बढोतरी हुई है। उन्होने बताया कि राजस्थान के हनुमानगढ जिले में बालिका लिंगानुपात 878 से बढक़र 953 हुआ है जो कि राजस्थान में सबसे अधिक बढ़ोतरी 75 अंको की है वही गंगानगर में 74, सीकर में 74, धौलपुर में 70, झुंझुनूं में 67, करौली में 67, दौसा 53, टोक 51,सवाईमाधोपुर में 49, जोधपुर में  45, बांसवाड़ा में 45, बूंदी में 44 व सबसे कम कोटा में 1 अंक की बढ़ोतरी हुई है। वही डूंगरपुर में बालिका लिंगानुपात 922 से घटकर 900 रह गया जो कि 22 अंको की कमी आई है वही उदयपुर में 12, प्रतापगढ व बीकानेर में 4-4 अंको की गिरावट आई है। 

चौधरी ने बताया कि राजस्थान में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत किए गये डिकॉय ऑपरेशनों के कारण बालिका लिंगानुपात में अधिक सुधार तो हुआ है लेकिन 0 से 5 वर्ष तक की उम्र में 1 लाख 95 हजार 887 बेटियों की मृत्यु होना बहुत ही चिंताजनक है। चौधरी ने कहा कि यदि इन 2 लाख बेटियों को बताया जाता तो बालिका लिंगानुपात में बेहतर सुधार देखा जा सकता था। राजन चौधरी ने कहा कि निति आयोग द्वारा जारी किये गये आंकड़ो के अनुसार राजस्थान के बालिका लिंगानुपात में गिरावट बताई गई थी जो कि पूर्णतया सही नही है। पीसीटीएस के आंकड़ो के आधार पर राज्य के बालिका लिंगानुपात का आंकलन बेहतर किया जा सकता है। उन्होने बताया कि राजस्थान में एक सरकारी अनुमान के अनुसार 19 लाख 60 हजार महिलाऐं गर्भवती होती है जिनमें से करीब  2 लाख 25 हजार महिलाओं का गर्भपात हो जाता है वही मृत शिशुओं को छोडक़र करीब 17 लाख बच्चे पैदा होते है जिनमे से 14 लाख  20 हजार की रिर्पोटिग स्वास्थ्य विभाग में दर्ज होती है। इनही आंकड़ो को आधार बनाकर उक्त आंकलन किया गया है। 




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