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Sunday, 25 February 2018

जयपुर:-सांभर महोत्सव का जादू सैलानियो के सिर चढ़ बोला


रिपोर्ट एक्सक्लूसिव,सांभरलेक (सुनील कुमावत) . सांभर झील किनारे चल रहे तीन दिवसीय रंगारंग सांभर महोत्सव में शनिवार सेलानियो को राजस्थानी कला, संस्कृति से रूबरू होने का  मौका मिला। पर्यटन नगरी मेें आयोजित इस महोत्सव को लेकर देशी-विदेशी सैलानियों में उत्साह देखते ही बन रहा है। राजस्थान की लोक संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य को लेकर इस प्रकार का महोत्सव पहली बार आयोजित किया जा रहा है। वही इस महोत्सव का जादू यहा आने वाले सैलानियो के सिर चढ़कर बोल रहा है। सांभर महोत्सव के आयोजक गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि यह महोत्सव अपने तरह का अलग और अनूठे अंदाज में हो रहा है। 

वही यहा आने वाले मेहमानो के लिए विटेंज कार रैली, ऊंट सवारी, पैरा ग्लाइडिंग, कार रैली, बाइक रैली, हॉट एयर बैलून, काइट फेस्ट आदि का जमकर लुफ्त उठा रहे है। वही राजस्थानी संगीत और नृत्य ने तो सभी को जूमने पर मजबूर कर दिया। सांभर महोत्सव की इवेंट पार्टनर वाइब्रेंट एंटरटेनमेंट की एमडी मीना गुप्ता ने बताया कि इस महोत्सव के जरिए सांभरलेक का नाम पर्यटन के मानचित्र पर लाने की एक छोटी सी कोशिश की गई है। जिससे इस मनमोहक पर्यटन नगरी का नाम देश ही नही बल्कि विदेश में उभर कर आ सके। जब कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य व केंद्र सरकार के द्वारा करोड़ो रुपयो खर्च कर कार्य कराए गए है 

लेकिन वास्तव में इसे धरातल पर लाने का कार्य सांभरलेक महोत्सव का आयोजन कर किया गया है। वही इस आयोजन को लेकर स्थानीय सहित सांभरवासियों व कई सामाजिक संस्थाओ ने भी आयोजको का तहेदिल से आभार जताया है। इस महोत्सव को सफल बनाने में आयोजक गजेन्द्र सिंह राठौड़, मीना गुप्ता, शुभम चक्रवर्ती, हर्ष राठौड़, मनीष मेहरिया, अमन सिंह आदि का योगदान रहा। वही आज होगा सांभरलेक महोत्सव का समापन।

सांभर महोत्सव ने दी अलग पहचान
सांभरलेक जो पर्यटन नगरी व फिल्म सीटी के नाम से जाना जाता है। वही सांभर झील में बनने वाले नमक ने तो इस झील की देश-विदेश में अपनी अलग ही पहचान बना रखी है। माना कि साभरझील विश्व प्रसिद्ध है। लेकिन इस झील का नाम पर्यटको की जुबा पर लाने का मुख्य कार्य इस सांभर महोत्सव के जरिए किया गया है। अभी तक सैलानियो ने सांभरलेक का बाम ही सुना था। लेकिन इसे धरातल पर लाने का सही कार्य सांभर महोत्सव ने किया है। इस आयोजन से सैलानियो को यहा की संस्कृति, कला व सांभर झील से रूबरू होने का मौक़ा मिला है। साथ यहां पहुचने वाले सैलानियों ने जमकर लुप्त उठया है।

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