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Tuesday, 20 March 2018

हनुमानगढ़:-जिला कारागृह में सुरक्षा व्यवस्था लगती महज दिखावा!खबर पढ़ हैरान रह जाओगे...!

File Photo (Demo)

लगातार निरक्षण के दौरान मिले मोबाईल व सिमकार्ड
आखिर कैसे पहुंच जाते है जेल में मोबाईल ?
कहने को जैमर लेकिन फिर भी मिल रहे मोबाईल!
हनुमानगढ़।(कुलदीप शर्मा) जिले की बड़ी जेल में लगातार मोबाइल फोन का मिलना चिंताजनक है। जेल प्रशासन व पुलिस अधिकारियों द्वारा समय-समय पर चलाये गए निरक्षण अभियान में हर बार मोबाइल फोन की मिलना जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल तो खोलता ही है। साथ मे सबसे सुरक्षित व परिंदा भी पर ना मार पाने वाली जेल में ऐसी घटनाओ के बाद लापरवाही की भी पोल खोल कर रख दी है। गौरतलब है कि गत दिनों पहले जेल में दो मोबाइल मिट्टी में दबे हुए मिलने की वजह से एक बार फिर चर्चा में रहे जिला कारागृह का ये पहला ही मामला नहीं था इससे पहले भी पांच मोबाइल फोन व सिमकार्ड जेल से बरामद किए गए थे। इन सभी निरक्षण की कार्रवाईयों में मिली लापरवाही किस ओर इशारा करती है वो आप भी समझ सकते हैं।


मिट्टी में दबे मिले थे मोबाइल
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अभी गत दिनों पहले जेल प्रशासन द्वारा किये गए निरक्षण में जेल के एक बैरिक के पीछे मिट्टी में दबे दो मोबाइल फोन बरामद हुए थे। इस मामले के बाद जेल के ही सुरक्षा गार्ड की तरफ से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज भी करवाया गया था। पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभियान के दौरान सुरक्षा वार्ड में बैरिक संख्या 3 के पीछे मिट्टी में दबे 2 मोबाइल फोन मिले थे। मोबाइल फ़ोन के मिट्टी में दबे मिलने के चलते गृह रक्षा दल के स्वयं सेवक राजकमल पुत्र राजबहादुर की ओर से 42 राज. कारावास संसोधन अधिनियम 2015 में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया करवाया गया था। बाद में इस मामले को लेकर सूत्र बताते है कि पुलिस ने बंदियों से पूछताछ भी की थी।

जैमर कैसे हुए फैल!
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जानकारों की माने तो यूँ तो कहने को जेल में जैमर लगा होने माना जा रहा है लेकिन जैमर होने के बावजूद भी बार-बार मोबाइल व सिम कार्ड कार्ड का मिलना तो शायद किस ओर इशारा कर रहा है आप लोग समझ भी रहे होंगे। अपुष्ट सूत्रों की माने तो जेल में मोबाइल मिलना व मोबाइल का उपयोग आदि बिना मिलीभगत के संभव तो नहीं है। फिर भी कई सवाल बने हुए है कि आखिर जेल में मोबाइल पहुंचता व पहुंचाता कौन है और आखिर जेल में जैमर किस हालात में हैं।

सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल!
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जिले की सुरक्षित जेल कही जाने वाली जिला काराग्रह में बार/बार मोबाइल व सिमकार्ड पहुंचने से सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। कहने को तो जेल में सामान लेकर जाने और आने-जाने वाले लोगों की गहन तलाशी ली जाती है। लेकिन इसके बावजूद जेल में सिम, मोबाइल और नकदी बिना मिलीभगत के पहुंचना संभव नहीं है। हम आपको फिर से बता दे कि जेल में मोबाइल और सिम आदि पहले भी मिल चुके है। माना जा रहा है कि जेल में लगा जैमर बेकार साबित हो रहा होगा तभी तो जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल इतना सुलभ हो रहा है। जिला कारागृह में लाखों रुपए खर्च कर जैमर लगाना बेकार साबित हो रहा है।

सवाल!आखिर कैसे पहुंच जाते मोबाइल?
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जिला कारागृह में हर बार की छापेमारी व तलाशी अभियान में आपत्तिजनक सामान मिल ही जाते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि कारागृह में मोबाइल जैसे सामान कैसे पहुंच जाते हैं। जानकार सूत्रों की माने तो कैदियों की पेशी के समय कैदियों की सुरक्षा में ढील एक बड़ा कारण है। इसके अलावा कारागृह में इनसे मुलाकात करने आने वाले लोगों के माध्यम से भी कैदियों के पास तक मोबाइल आसानी से पहुंच जाते हैं। हालांकि इन बातों की रिपोर्ट एक्सक्लूसिव पुष्टि तो नहीं करता लेकिन सूत्रों के अनुसार ऐसा सम्भव हो पा रहा है जिसकी वजह लापरवाही ही मानी जायेगी।

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