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Monday, 26 March 2018

Special Part-2:- हनुमानगढ़ में नियमो को ताक पर रख शहर में चल रहे लेबोरेट्री सेंटर,चन्द दिनों में बन जाते है लैब टेक्नीशियन!

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जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग बना मूकदर्शक
हनुमानगढ़।(कुलदीप शर्मा) शहर से लेकर जिले।भर में नियमों को ताक पर रखकर सैकड़ों पैथोलॉजी सेंटर चलाये जा रहे है। हनुमानगढ़ जिले में मात्र उंगलियों पर गिने जा सके उतने ही पैथोलॉजी सेंटरों के पास लाइसेंस बताये जाते है। बाकियो के पास किसी प्रकार का कोई प्रमाण पत्र या लाइसेंस नहीं है जिसके चलते वो किसी प्रकार की जांच कर सकते है। परन्तु फिर भी बड़े ही आराम से बिना किसी नियम-कायदों के सेंकडो पैथोलॉजी सेंटर सन्चालित किये जा रहे है। असल मे सूत्रों की माने तो खुद चिकित्सा विभाग को भी इस बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं है। काफी लंबे समय से शहर में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं देखी गयी है जिसमे चिकित्सा विभाग ने किसी पैथोलॉजी सेंटर पर निरक्षण करते हुए दिशा-निर्देश या बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया हो। जिसके चलते इन पैथोलॉजी सेंटरों पर बेखौफ खून-पेसाब की जांच धड़ल्ले से की जाती है। 


जिला प्रशासन व स्वास्थ्य महकमा नहीं गम्भीर!
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सूत्रों की माने तो शहरभर में चल रही फ़र्ज़ी लेबोरेट्रीयों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे अनिबंधित केंद्र बेखौफ हो धड़ल्ले से जांच कर रहें हैं। इसको लेकर जिले का स्वास्थय महकमा और जिला प्रशासन दोनो ही कहीं गंभीर नजर नहीं आते है। क्योंकि पिछले कई वर्षों से अवैध रूप से संचालित ऐसे जांच सेंटरों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और ना ही यहां की जांच की गई है। जिससे इतना तो साफ होता है कि कोई न कोई कारण तो ऐसा रहा ही होगा जिसके चलते जिम्मेदार अधिकारियों ने आजतक जांच सेंटरों पर कोई कार्रवाई नहीं कि है। 



कौन चलाता लेब ? किससे ने दी परमिशन?
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शहर भर में अवैध रूप से संचालित पैथोलॉजिक लेबोरेट्रीयों का निबंधन तो दूर बिना चिकित्सक व बिना प्रशिक्षित टेक्नीशियन के ही चलाए जा रहें हैं। ऐसे में यहां के जांच रिपोर्ट के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। उससे भी बड़ी बात उसी जांच रिपोर्ट पर चिकित्सकों द्वारा दवा दी जाती है। इस तरह खुले तौर पर मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अब इन सभी बातों से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन पर नियम-कायदों को लेकर कितना बोझ होगा! असल मे इन लेबोरेट्री संचालको ने कहां से प्रशिक्षण प्राप्त किया है और किस जगह से प्रमाण पत्र लेकर आये है किसी बात का अता-पता नहीं चल पाता है। चिकित्सा सूत्रों की माने तो शहर में अधिकतर जांच सेंटरों के पास टेक्नीशियन तो दूर की बात किसी भी प्रकार का प्रमाणपत्र पत्र भी नहीं है। ऐसे में आप सभी अंदाजा लगा सकते हैं कि हर रोज बीमारियों से ग्रसित लोग कितनी ही बार गलत रिपोर्ट का सामना करते होंगे लेकिन किसी प्रकार की कोई कार्रवाई ना होने के चलते आज भी मरीज परेसानी झेलने पर मजबूर हो रहे हैं!


क्या कहते है नियम
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शहर में चल रही लेब को लेकर जब जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि पैथोलॉजी लैब चलाने के लिए एमडी इन पैथोलॉजी चिकित्सक होना चाहिए। यदि नहीं है तो कम से कम एमबीबीएस चिकित्सक होना अनिवार्य होता है। बिना चिकित्सक के जितने भी लैब चलाए जा रहे हैं, सभी अवैध हैं। साथ ही जानकारों से मिली जानकारी के अनुसार लैब खोलने से पूर्व किसी प्रकार का निबंधन कराना जरूरी होता है।

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