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Monday, 24 September 2018

ग्रह मंत्री के सामने छात्रों ने किये सवाल-जवाब:-कैसे खत्म होगी धर्म और जाति की राजनीति ?


लखनऊ। भारत की राजनीति से जाति व धर्म कैसे अलग किया जाए? भारत अमेरिका के करीब क्यों जा रहा है? धारा-370 कब खत्म होगी? गृहमंत्री राजनाथ सिंह पर सोमवार को ऐसे कई सवाल दागे गए। हैरानी की बात है कि यह सवाल किसी वरिष्ठ पत्रकार या बुद्धिजीवी ने नहीं बल्कि युवाओं ने उठाया। जिसका, गृहमंत्री ने काफी बेबाकी से जवाब भी दिया। मौका था गोमतीनगर के एक निजी संस्थान में आयोजित युवा संसद कार्यक्रम का। जिसमें, छात्रों को सांसद और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से सवाल करने का मौका दिया गया। छात्रों के सवाल और गृहमंत्री के जवाबों पर पेश है।
सवाल और जबाब
श्रेया उपाध्याय- धारा 370 को हटाने के लिए सरकार क्या कर रही है?
राजनाथ सिंह- धारा 370 पर एक शब्द बोला तो अंतरराष्ट्रीय खबर बन जायेगी। प्रतीक्षा करनी होगी। बहुत से कारण होते हैं। मैं साफ कर दूं कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था है और रहेगा। दुनिया की कोई ताकत जम्मू-कश्मीर को हमसे अलग नहीं कर सकती। कोई भी फैसला लेने से पहले हम आम सहमति बनाने पर काम करते हैं और यह सही भी है।
ऐश्वर्या राज – अमेरिका की ताकत स्थिर हो रही। ऐसे में भारत क्यों उसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है?
राजनाथ सिंह – ना काहू से दोस्ती ना कह से बैर। हम सबसे अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं। भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की है। यह सोच कि भारत अमेरिका के पास चला गया है। रूस और दूसरे देशों से दूरी बढ़ती जा रही है। हकीकत नहीं है।

अक्षय कुमार -क्या 2019 के चुनाव करीब आ रहे इसलिए राहुल गांधी ने धार्मिक यात्रा शुरू की हैं और महागठबंधन की तरफ बढ़ रहे। आपकी पार्टी को खतरा लगता है ?
राजनाथ सिंह -हमारा किसी से व्यक्तिगत विरोध नहीं है। इसलिए हम बोलते नहीं हैं। हां, लोगों की भावनाओं का शोषण करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अब क्या कर रहे हैं ? कैसे कर रहे हैं? यह उनका व्यक्तिगत मामला है। वो क्यों कर रहे आप ज्यादा समझेंगे।

अंकित मिश्रा- राजनीति का आधार जाति व धर्म बन रहा है। सबका साथ सबका विकास नारा बनकर रह गया है। हम वोट बैंक की राजनीति से कब मुक्त होंगे?
राजनाथ सिंह – स्वतंत्र भारत में आम लोगों की राजनीति के प्रति जो भावना होनी चाहिए थी वह नहीं रही है। इसके लिए राजनीति करने वाले नेता खुद जिम्मेदार हैं। कृति और कथन में अंतर नहीं होना चाहिए। मैंने कभी वोट मांगते समय ये नहीं कहा की ये कर दूंगा। राजनीति शब्द के अर्थ को समझे। राज और नीति… ऐसा राज जो समाज को सही दिशा में ले जाने का काम करे। राजनीति शब्द अपना अर्थ और भाव खो चूका है। मैं आह्वान करता हूं कि युवा आगे आएं। कम से कम भारत में राजनीति के खत्म होते इस अर्थ को पुनरू स्थापित करें। राजनीति जाति धर्म पर नहीं होनी चाहिए। कभी कभी लोग सोचते हम फलां जाति धर्म के खिलाफ बोलेंगे तो मौका मिल जाएगा। राजनीति सरकार नहीं देश बनाने के लिए की जाती है।
शालिनी – सीमा पर घुसपैठ रोकने में क्या दिक्कतें आ रही?
राजनाथ सिंह – सीमाएं छह देशों से घिरी हैं। अब तक की व्यवस्था में तार लगाए जाते रहे हैं। कुछ समय पहले इजराइल गया था। वहां का बॉर्डर देखने गए। वहां 10-12वीं के बच्चे मिलिट्री ड्रेस में स्वागत को तैयार थे। वहां हमने सुरक्षा में तकनीकी का इस्तेमाल देखा। भारत के इतिहास में पहली बार हमने तय किया और इसे लागू भी कर रहे हैं। 11 किलोमीटर का पायलट प्रोजेक्ट जम्मू में शुरू कर दिया है। जल्द असम में शुरुआत करने जा रहे हैं।

शुजा रहमान – जनसंख्या की दृष्टि से दुनिया में पहले नंबर पर आने जा रहा है। चीन की तरह एक बच्चा का निर्णय क्यों नहीं लागू करते ?
राजनाथ सिंह – इस मुद्दे पर देश में बहस होनी चाहिए। व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि यह होना चाहिए। कहीं राजनीति स्तर पर अलग अलग मत हैं। मैं चाहूंगा कि इस मुद्दे पर देश भर में चर्चा होनी चाहिए और एक आम सहमति बननी चाहिए।

विभोर – सरकारी और प्राइवेट स्कूल के बीच की खाई को कैसे अंतर को कैसे कम कर पाएंगे। कैसे सब बराबर हों?
राजनाथ सिंह – सरकार शिक्षा नीति में बड़े सुधार और बदलाव कर रही है। इससे इसे कम किया जा सकेगा। युवाओं को तैयार करने के लिए स्किल डेवलपमेंट शुरू किया।स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, मुद्रा। आने वाले समय में इसके अच्छे नतीजे दिखेंगे।
तनीषा मिश्रा -देश के अच्छे संस्थानों से प्रतिभा पलायन का मुख्य कारण आरक्षण जनित कुंठा तो नहीं। अगर है तो आपकी सरकार क्या कर रही?
राजनाथ सिंह-आजादी के समय ही नेताओं ने सूझबूझ पर आरक्षण के नियम लेकर आए थे। तब और आज भी जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात देखिये। समय लगेगा लेकिन जितनी तेजी से भारत आगे बढ़ रहा वो समय दूर नहीं जब विश्व में भारत को इंटेलेक्चुअल राजधानी की पहचान मिलेगी। जहां तक प्रतिभा का सवाल है तो वह भारत ही दुनिया को ज्ञान देता आया है। वैज्ञानिकों के नतीजे गलत हो सकते हैं, लेकिन हमारे ऋषियों का ज्ञान गलत नहीं है।

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