Report Exclusive, Hindi News, Latest News in Hindi, Breaking News, हिन्दी समाचार -India भारत और रूस की S-400 डील को लेकर अमेरिका परेशान क्यों..? - Report Exclusive

Report Exclusive - हर खबर में कुछ खास

Breaking

Friday, 21 September 2018

भारत और रूस की S-400 डील को लेकर अमेरिका परेशान क्यों..?



नई दिल्ली(जी.एन.एस) भारत अरबों डॉलर खर्च कर रूस से S-400 ट्रायम्फ मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम्स खरीदने के फाइनल स्टेज में पहुंच चुका है। इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को कहा कि रूस से इस तरह के बड़े सैन्य उपकरण खरीदने को ‘महत्वपूर्ण सौदा’ माना जाएगा और इसके कारण अमेरिका प्रतिबंध भी लगा सकता है। भारत के लिए अमेरिका का यह बयान काफी मायने रखता है। ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण है कि अमेरिका रूस के इस मिसाइल सिस्टम को लेकर इतना चिंतित क्यों है? रक्षा जानकारों की मानें तो अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से यह एयर डिफेंस सिस्टम न खरीदे। US की चिंता इस बात को लेकर है कि S-400 का इस्तेमाल अमेरिकी फाइटर जेट्स की स्टील्थ (गुप्त) क्षमताओं को टेस्ट करने के लिए किया जा सकता है। इतना ही नहीं, माना जा रहा है कि इस सिस्टम से भारत को अमेरिकी जेट्स का डेटा मिल सकता है।


अमेरिका को यह डर भी सता रहा है कि यह डेटा रूस या दुश्मन देश को लीक किया जा सकता है। S-400 सिस्टम का इस्तेमाल न सिर्फ अमेरिका के F-35s से जुड़े रेडार ट्रैक्स की पहचान करने में किया जा सकता है बल्कि इससे F-35 के कॉन्फिगरेशन का भी ठीक-ठीक पता लगाया जा सकता है। बताया जाता है कि F-35 लाइटनिंग 2 जैसे अमेरिकी एयक्राफ्ट में स्टील्थ के सभी फीचर्स नहीं हैं। इस तरह के प्लेन को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि आगे से रेडार नेटवर्क पर यह पकड़ में नहीं आता है, लेकिन साइड और पीछे से यह एयरक्राफ्ट पूरी तरह से स्टील्थ नहीं है। S-400 सिस्टम के रेडार F-35 को डिटेक्ट और ट्रैक कर सकते हैं।



भारत को लेकर अमेरिका को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। यह डर और चिंता बेवजह है। भारत का ट्रैक रेकॉर्ड किसी ऐसे देश की तरह नहीं रहा है, जो एक देश की डिफेंस टेक्नॉलजी को दूसरे देश को ट्रांसफर करता हो। अमेरिका ही नहीं दुनिया का कोई भी देश ऐसे आरोप नहीं लगा सकता है। अमेरिका पिछले डेढ़ दशक से भारत को रक्षा उपकरण बेच रहा है और कोई भी तकनीक किसी दूसरे देश तक नहीं पहुंची है। वास्तव में रूस, अमेरिका, फ्रांस और इजरायल से सम्मिलित रूप से मिले सैन्य उपकरणों ने भारतीय सेना के लिए बड़ी भूमिका निभाई है। अमेरिका की चिंता इस बात को लेकर भी है कि भारत ही नहीं, कई और देश S-400 सिस्टम को खरीदने की इच्छा जता रहे हैं। ऐसे में साफ है कि अमेरिका का ऐंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स मार्केट शेयर खो रहा है।



अगर कई देशों को S-400 मिलता है तो कोई भी अमेरिकी सिस्टम इसकी टक्कर नहीं ले पाएगा। अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान की चिंता एक और है कि अगर कोई देश S-400 सिस्टम खरीदता है और उसके पास अमेरिकी लड़ाकू विमान पहले से हैं या खरीदने की योजना है तो इससे वॉशिंगटन के लिए चुनौती पेश हो सकती है। भारत और रूस के बीच इस मल्टी-बिलियन डॉलर की डील अंतिम स्टेज में है और ऐसा माना जा रहा है कि अक्टूबर के पहले हफ्ते में भारत-रूस समिट के दौरान कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। अमेरिका ने चीन की एक मिलिटरी एजेंसी और इसके निदेशक पर रूस से रक्षा उपकरण खरीदने के आरोप में प्रतिबंध लगा दिया है। चीनी की मिलिटरी एजेंसी पर यह प्रतिबंध अमेरिका के एक कानून का उल्लंघन करने के लिए लगाया है। उस पर आरोप है कि अमेरिकी कानून का उल्लंघन करके रूस की हथियार निर्यातक कंपनी से डील की गई। अमेरिका के गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि 2017 में चीन ने 10 सुखोई-35 लड़ाकू विमान और 2018 में एस-400 जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम खरीदने की डील की।

No comments:

Post a Comment

इस खबर को लेकर अपनी क्या प्रतिक्रिया हैं खुल कर लिखे ताकि पाठको को कुछ संदेश जाए । कृपया अपने शब्दों की गरिमा भी बनाये रखे ।

कमेंट करे