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Saturday, 21 November 2020

जिले में यूरिया उर्वरक के सीमावर्ती राज्यों में अवैध विक्रय की रोकथाम हेतु बैठक

जिले से बाहर व दूसरे राज्य में परिवहन करने पर होगी कड़ी कार्यवाहीः- जिला कलक्टर

श्रीगंगानगर,। जिला कलक्टर श्री महावीर प्रसाद वर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में जिले में यूरिया उर्वरक के सीमावर्ती राज्यों में अवैध विक्रय की रोकथाम हेतु बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में जिला कलक्टर श्री महावीर प्रसाद वर्मा, उपनिदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद, श्रीगंगानगर डाॅ जी.आर.मटोरिया, सहायक निदेशक डाॅ रमेश चन्द्र बराला, कृषि अधिकारी प्रदीप शर्मा, जिले के पेस्टीसाईडस एशोसियेशन के जिला अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश शर्मा सहित जिले के विभिन्न मण्डीयों के आदान विक्रेता संगठनों के पदाधिकारीयों व किसान संगठनों से श्री पृथीपाल सिंह संधु, श्री संतबीर सिंह व श्री बलदेव सिंह ने भाग लिया।
बैठक में जिला कलक्टर श्री वर्मा ने बताया कि जिले में रबी सीजन में सामान्यत 6.50 से 7 लाख हैक्टेयर में मुख्यतः सरसों, गेहूं, जौ, चना आदि फसलों की बुवाई होती है। इस वर्ष रबी सीजन में अब तक 353741 हैक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हो चुकी है। रबी सीजन हेतु लगभग एक लाख तीस हजार मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता रहती है व एक लाख बीस हजार मैट्रिक टन यूरिया का आवंटन रबी सीजन में होता है। इस वर्ष अब तक 42 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आवक हुई है।
जिला कलक्टर ने बताया कि कृषि विभाग की तरफ से अवगत करवाया गया है कि गत सप्ताह भर से लगातार पंजाब के कृषकों के द्वारा यूरिया क्रय कर पंजाब ले जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही है जिस पर कृषि विभाग द्वारा विभिन्न मण्डियों में आदान विक्रेताओं का निरिक्षण कर कार्यवाही की है। जिला कलक्टर ने निर्देश दिये कि कृषि विभाग के निरिक्षक व अन्य फिल्ड स्टॅाफ नियमित रूप से उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर पाॅस मशीन व स्टाॅक का मिलान कर सुनिश्चित करे कि जिले का यूरिया बाहर नही जाये और इस कार्य में संलिप्त पाये जाने पर सम्बंधित उर्वरक विक्रेता के खिलाफ सख्त कार्यवही करे। साथ ही प्रबन्ध निदेशक गंगानगर केन्द्रीय सहकारी बैंक व उपरजिस्ट्रार सहकारी समितियों को ग्राम सेवा सहकारी समिति व क्रय -विक्रय सहकारी समितियों को पाबंद करने व निरंतर माॅनिटरिंग करने के निर्देश दिये।
स्थानीय कृषकों के एक आधार कार्ड पर कृषक को अधिकतम 10 थैले यूरिया ही देने के निर्देश दिये। जिले से बाहर व पडोसी राज्य के कृषकों के आधार कार्ड पर यूरिया विक्रय नही करने हेतु भी निर्देशित किया गया। जिला कलक्टर ने बताया कि यूरिया उर्वरक का उर्वरक नियंत्राण आदेश 1985 के प्रावधान अनुसार फसल बुवाई क्षेत्र के आधार पर मांग अनुसार आवंटन राज्य व जिलावार भारत सरकार द्वारा किया जाता है। इसलिए निर्धारित से अधिक यूरिया जिले को किसी भी स्थिति में प्राप्त नहीं होगी व पंजाब में जिले को आवंटित यूरिया जाने से इस जिले में आने वाले समय में यूरिया की कमी आ सकती है।
एक राज्य से उर्वरक का दूसरे राज्य में अनाधिकृत लाना-ले जाना और उर्वरक मूवमेंट कंट्रोल आॅर्डर 1973 का स्पष्ट उल्लंघन है। यूरिया उर्वरक के अवैध विक्रय को रोकने हेतु जिला कलक्टर ने बताया कि सीमावर्ती राज्य के नाको पर परिवहन साधनों की जांच कि जायेगी व अगर कोई व्यापारी इस प्रकार बाहर के राज्यों के कृषकों को यूरिया का अवैध विक्रय करते पाया जाता है या किसी साधन से अवैध मूवमेंट होता है, तो उनके विरूद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
डाॅ जी.आर.मटोरिया ने उपस्थित आदान विक्रेताओं व विभिन्न उर्वरक निर्माता कम्पनी के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि स्थानीय कृषकों को भूमि स्वामित्व के अनुसार ही उर्वरक विक्रय करना है तथा उर्वरक विक्रय सम्बंधी समस्त रिकोर्ड का संधारण भी आवश्यक रूप से करना होगा। यदि किसी भी आदान विक्रेता द्वारा अवैध रूप से यूरिया का विक्रय किया जाना पाया जाता है, तो उसके विरूद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985, उर्वरक मूवमेंट निंयत्रण आदेश 1973 व आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत सख्त कार्यवाही कर पुलिस में एफ.आई.आर., जब्ती व उर्वरक लाइसेंस निलंबन की कार्यवाही की जा सकती है।
साथ ही डाॅ जी.आर. मटोरिया ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया की जिले के कृषकों में इस बात का प्रचार-प्रसार किया जावे की वर्तमान समय में भी यूरिया की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है साथ ही भविष्य में उर्वरक यूरिया की कमी नही आवेगी। अतः कृषक एक बार में ही पूरे सीजन की यूरिया क्रय न करे साथ ही स्थानीय कृषक पंजाब के कृषकों को यूरिया क्रय करके ले जाने में सहयोग न करें। यदि स्थानीय कृषकों द्वारा अपने आधार कार्ड से क्रय कर अवैध उर्वरक मूवमेंट में संलिप्त पाए जाने पर उक्त आधार कार्ड की पहचान कर उस कृषक को भविष्य में यूरिया उर्वरक की प्राप्ति से वंचित भी किया जा सकता है। 

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