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Thursday, 18 October 2018

मुस्लिम महिलाओ को समर्थन और हिन्दु महिलाओ का विरोधः भाजपा तेरा ये कैसा खेल..?


वीएचपी से निकाले गये नेता प्रवीण तोगडियाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में कहा की हिन्दुओने राम मंदिर के लिये भेजा और वे मुस्लिम महिलाओ के वकील बन गये। तोगडियाने ठीक कहा या नहीं ये तो वोही जाने लेकिन केरल के सबरीमाला मंदिर मे सभी आयु की महिलाओ को प्रवेश के लिये देश की सब से बडी अदालतने कह दिया फिर भी केन्द्र में सत्तारूढ दल भाजपाने अदालत के निर्णय का विरोध करते हुये कहा की सबरीमाला मंदिर प्रबंधको ने 10 से 50 वर्ष की आयु वाली महिलाओ के प्रवेश पर जो बैन लगाया है वह सही है। अन्य शब्दो में कहे तो अदालत का फैसला गलत है। सबरीमाला मंदिर हिन्दु महिलाओ के आस्था के बिन्दु समान है। एक ओर तो भाजपा और प्रधानमंत्री मोदीजीने, मुस्लिम महिलाओ के तीन तलाक पर ईसी अदालतने कानून बनाने को कहा तो सरकारने पट.. पट.. कानून बनाया। अध्यादेश भी लाया। लेकीन जब हिन्दु महिलाओ की समानता की बात आइ तब भाजपाने मूंह फेर दिया…! छी..



तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओ के साथ घोर अन्याय होता है ऐसा सरकारने माना और मुस्लिम महिलाओ के कल्याण तथा न्याय देने के लिये मोदीजी बडी तेजी से आगे आये। बात जब हिन्दु महिलाओ के समानता की आइ तो मोदीजी और उनके नेतागण क्यों खामोश है। तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओ के साथ अन्याय हुया वैसे ही सबरीमाला में सभी आयु की महिलाओ को प्रवेश नहीं देने से हिन्दु महिलाओ के साथ भी घोर अन्याय हो रहा है। तब अपने आप को हिन्दुओ की पार्टी कहनेवाले नेता विशेष कर महिला मंत्री भी मौन बनी है। ये कैसी नीति है। क्या ऐसा कभी होता है क्या..? क्या सबरीमाला में सिर्फ केरल की महिलायें ही दर्शन को आती है? केरल की महिलाओ के साथ अन्याय क्यूं। क्या देश के अन्य राज्यो से हिन्दु महिलाये नहीं आती इस मंदिर में..?



केरल की वामपंथी दलो की सरकार की भाजपा द्वारा आयेदिन आलोचना होती है। लेकिन सबरीमाला मंदिर के मामले में वामपंथी सरकारने अदालत के फेंसले को सर आंखो पर लगाया जब की भाजपाने मूंह बनाया। क्या इसे भाजपा की स्थानिय राजनीति कहा जाय..? क्या इसे वोटबेंक की राजनीति कहा जाय..? मोदीजी कहते है की वोटबेंक की राजनीति गलत है। प्रतिपक्ष वोटबेंक की राजनीति करते है अपने नीजी स्वार्थ के लिये, ऐसा उन्होंने फरमाया है। केरल की कुछ महिलायें अदालत के निर्णय के खिलाफ है। उनका मानना है की सभी महिलाओ को प्रवेश नहीं देना चाहिये। भाजपा इन महिलाओ का समर्थन कर रहा है। क्या ये वोटबेंक की राजनीति नहीं तो और क्या है..? सभी महिलायें एक समान है। जैसे मुस्लिम धर्म की महिलायें वैसे ही हिन्दु धर्म की महिलायें। तो फिर हिन्दु महिलाओ के साथ भाजपा क्यों अन्याय कर रही है। भाजपा खुद धर्म के नाम पर भेदभाव करे तो कोंग्रेस को कोइ क्या कहे..? भाजपा सिर्फ केरल की वोटबेंक की राजनिती न करे। तीन तलाक की तरह सबरीमाला के लिये भी अद्यादेश ला कर हिन्दु धर्म की सभी महिलाओं को प्रवेश मिले ऐसा कानूनन प्रावधान करे। तुम्हारा खून खून और हमारा खून पानी….ये दोहरी और दोगली नीति न करे भाजपा।

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