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Thursday, 24 January 2019

गणतंत्र दिवस 2019:- क्या किसान के लिए कोई संविधान नही ?

गणतंत्र दिवस 2019 विशेष:-किसान(Demo Photo)

आज हम गणतंत्रा के इस पर्व पर भारतवर्ष तरक्की को देखे  जो की बेहद सराहनीय भी है । आज मेरे देश के विज्ञानं की तकनीकों ने इतनी प्रगति कर ली की देश और दुनिया में घटित खबर को क्षण भर में प्राप्त कर लेते है। आवागमन भी काफी सुगम हो रहा है हम हर क्षेत्र में प्रगति भले ही कर रहे हो लेकिन हमारी आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहा जाने वाला किसान दिनोदिन पिछड़ ही रहा है  किसान खेती करने में भले नई तकनीकों का प्रयोग कर रहा हो लेकिन बाजार भाव में वो लाचार सा ही नजर आता है । 



सरकार अपने कर्मचारियों के लिए हर वर्ष सोचती है पर किसान के लिए सोच पाना उसके लिए मुश्किल सा प्रतीत होता है सरकार कोई भी हो वो महज किसान प्रगति का  ढोंग ही करती है असल में वो इसकी तरक्की नही चाहती ना ही इससे ये हजम होती है क्योंकि सरकारों की कहि न कही मानसिकता ये ही रहती है की शहरों में पलायन हो और आज ये देखने को भी मिल रहा है किसान  अपने पुत्र को शौक से नही मजबूरी वंश खैती करवाने पर विवश है। आज अनेक किसान संगठन कार्यरत है लेकिन बस वो भी राजनितिक रोटियां ही सेक रहे है । किसान गरीब है ये मानसिकता लेकर चलने वाले तमाम गरीब संगठन बेहद ही जल्द खुद अमीर हो जाते है ऐसा इतिहास रहा है।



 लेकिन किसान की इस लाचार स्थिति का कोई उत्तरदायी है तो वो खुद किसान ही हो क्योकि वो नेतृव्य नही जानता वो किसी न किसी से नेतृव्य करवा उसके पीछे ताकत लगाता है पर वो अपना उल्लू सीधा कर चलता बनता है और ये यथास्थिति खड़ा रहता है । सरकार भले कोई भी कोई भी किसान हितैषी नही हो सकती है ये किसान को सक्षम नही लाचार बनाना चाहती है किसान ज़रा सोचे आज प्रदेश सातवें वेतन आयोग की समय से गुजर रहा है लेकिन किसान जो अर्थव्यवस्था का पालनहार उसके लिए कितने वेतन आयोग बने ये आज भी सवाल ही है ?  आज देश में वोटों का सीजन है सभी राजनीतिक पार्टियों के सफेदपोश हमे आकर्षित कर रहे है कुछ नए भी किस्मत आजमाने के लिए मैदान है पर ज़रा आप सोचे कितने किसान चुनाव लड़ रहे है हाल ही में राजस्थान की विधानसभा में 200 में से कितने किसान सदस्य थे हां कुछ कागजी किसान हो भी सकते है बनावटी किसान हैतेशी भी लेकिन शायद ही कोई सत्ताधारी विधायक विधानसभा में किसान की बात करता हो विपक्ष मजबूत है लेकिन इनका तो सिस्टम है पांच तू पांच बस यु ही आरोप प्रत्यारोप लगा कर अपनी रोटियां सेक लेंगे। लेकिन जब वक्त आता है तब किसान  अपने नीजि स्वार्थों को लेकर पार्टीयो से जुड़ गया अपने वोटो का बंटाधार कर लिया हर बार ही भांति इस बार भी आज जो आपके चरणों में है चुनाव होते ही आप इनके चरणों में होंगे  देश में इन्ही दो चरणों के माध्यम से ही चुनाव सम्पन्न होंगे। 



आप किसान है लाजमी है कि आप बुद्धिजीवी है अन्यथा  भूगर्भ में बीज डालकर उसके भविष्य बताना बिन बूद्धि का काम प्रतीत नही होता लेकिन अगर किसान अपनी स्थिति में सुधार चाहता है जो सर्वप्रथम तो वो सभी वैशाखिया छोड़ दे उनका कोई नही वो स्वयं ही कुछ कर सकता अन्य कोई भी हो चाहे वो आपका इस्तेमाल कर रहे है दूसरा आपको खुद को कमजोर आंकना छोड़ना होगा क्योंकि आप भूगर्भ में बीज डालकर इस कुदरत से 100 गुना लेने में सक्षम है तो फिर ये भौतिक संसार आपके आगे तुच्छ ही है तीसरा आपको खुद नेतृव्य करना होगा भले वो चुनाव हो या आंदोलन अरे आप सोचे तो सही आपके सिंचाई  पानी पर भी राजनीती की जा रही है जिस पर आपका हक़ फिर भी भीख की तरह मिलता है कभी दूषित तो कभी मिलता ही नही और इन कर्णधारो से निवेदन वो अंन्तदाता पर राजनीती छोड़े अगर ये समर्थ हो गया तो भी वोट आप में से ही किसी को देगा । 




 आज इस गणतंत्र दिवस पर किसान की बात करे तो हमें ये स्वीकार की किसान  को विकसित करने के लिए राजकोष से अनेक बजट उठते है पर क्या वो वास्तव में किसान तक पहुंचे इस पर जरा सोचिए कर्णधारो ? , लेकिन सविधान लिखा गया उसका हम सम्मान भी करते है लेकिन क्या उसमे किसान के लिए कुछ न था अरे अंन्तदाता बीज बोए तो यूरिया के लिए लाइन में फसल बेचे तो टोकन के लिए लाइन में आपने इसे बना क्या रखा है भाव भी आपका फिर भी मजबूर हताश किसान जब व्यापारी के पास खड़ा हो तो खुद को छोटा समझता अरे ओ बुद्धिजीवी वो जो भी है ना तेरे बलभूते पर है पर ना ये किसान सोचता और ना सरकार हरेक एक की एक ही मंशा है किसान को खा लो बस ,कुछ किसान की मानसिकता को भी ग्रहण लगा पड़ा है इसे चाहिए मुफ्त में बस कर्ज माफी इसी घटिया मानसिकता का नमूना है अरे जिसकी मेहनत को देख दुनिया को मेहनत करनी आई वो आज मुफ्त में से पैसे चाहता है मजदूर खाली बैठ मनरेगा से पैसा लाना चाहता है लेकिन ये सब कब तक होगा जरा सोचिए



लेखक का परिचय...
लेखक:-गगनदीप पारीक

गगनदीप पारीक स्वतंत्र पत्रकार

34 एलएनपी पोस्ट घमुड़वाली (335041) तह. पदमपुर श्री गंगानगर

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