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Tuesday, 22 January 2019

कोचिंग संस्थानों व पीजी के विद्यार्थियों पर रहेगी निगरानी जिला स्तर पर पर्याप्त निगरानी तंत्र की स्थापना होगीः- जिला कलक्टर


श्रीगंगानगर। जिला कलक्टर श्री शिवप्रसाद मदन नकाते ने कहा कि जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत विधार्थियों को मानसिक सम्बलन एवं सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पीजी में निवास करने वाले विधार्थी द्वारा देर रात्रि तक पंहुचना या रात भर बाहर रहने पर इसकी सूचना संबंधित छात्रा के परिजनों को दी जाये, ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।



जिला कलक्टर श्री नकाते मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाहॉल में आयोजित जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक में बताया कि वर्तमान में प्रभावी विभिन्न प्रावधानों के परिपेक्ष में पुलिस, चिकित्सा विभाग, स्थानीय निकाय द्वारा समस्त कोचिंग संस्थाओं एवं छात्रावासों के प्रबंधन को नियंत्रित किया जायेगा। यदि किसी कोचिंग संस्थान अथवा छात्रावास संचालकों द्वारा दिशा निर्देशों की अवहेलना की जाये तो उनके विरूद्ध संबंधित विभागों के वर्तमान कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने बताया कि विधार्थियों व अभिभावकों का जिला प्रशासन से सीधा संपर्क स्थापित किये जाने हेतु एक तकनीकी युक्त समस्या समाधान तंत्रा स्थापित किया जायेगा। 



जिसे अपेक्षित सॉफ्टवेयर के माध्यम से सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जायेगा। तकनीकी कार्मिकों द्वारा इसका संचालन किया जायेगा। इस व्यवस्था के प्रबंधन के लिये एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी, जो शिकायतों, समस्याओं का विवरण जिला स्तरीय समिति को 48 घंटे की अवधि में आवश्यक रूप से प्रस्तुत करेगें। जिला स्तरीय समिति तुरन्त निस्तारण की कार्यवाही करेगी एवं संबंधित कोचिंग संस्थान एवं छात्रावास संचालक अथवा विभाग को निर्देशित करेगी।



जिला कलक्टर ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं विभागों के समन्वय से सुनिश्चित की जायेगी। कोचिंग संस्थानों व छात्रावासों से संबंधित पुलिस थाना क्षेत्रा के लिये अलग-अलग प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जायेगी। सभी अधिकारियों के प्रभारी अधिकारी अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन होंगे। प्रभारी अधिकारी प्रत्येक सप्ताह एक निश्चित दिवस को समीक्षा बैठक आयोजित की जायेगी। जिला कलक्टर ने बताया कि इसका उद्देश्य छात्रा-छात्राओं के अध्ययन के तनाव को कम करने के लिये उनके कोचिंग एवं आवासीय क्षेत्रों के निकट मनोरंजन, खेलकूद व सांस्कृतिक गतिविधियों की सुविधा स्थापित करना है।

उन्होंने बताया कि इस कार्य में प्रशिक्षित व अनुभवी मनोविशेषज्ञों की सुविधा व छात्रा-छात्राओं को उचित मार्गदर्शन दिया जाकर उनके आत्मविश्वास व आत्मबल को पुष्ट बनाना है। पुलिस सहायता व मार्गदर्शन कियोस्क की सुविधा के लिये सादा वस्त्रा में पुलिस कार्मिकों को लगाया जायेगा। विधार्थियों को संस्थानों में ही काउसलिंग या अन्य मुद्रित सामग्री के माध्यम से की जाये ताकि विधार्थी अपने भविष्य के प्रति तनावग्रस्त नही हो और वे नया विकल्प चुन सकें। शिक्षण कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व विधार्थियों को शैक्षणिक वातावरण, सांस्कृतिक रहन-सहन व सामाजिक ढांचे के बारे में प्रारम्भिक जानकारी देने के लिये कार्यशाला आयोजित की जाये। अभिभावको को यह भी स्पष्ट रूप से समझाया जाये कि वे बच्चों में न तो मानसिक दवाब बनाये और न ही अपनी अपेक्षाओं को बच्चों के सामने बार-बार दोहराये। उन्हें इसके नकारात्मक प्रभाव बताए जाये। कोचिंग संस्थानों के परिसर में ही पोष्टिक भोजन व अल्पहार की सुविधा के लिये न लाभ न हानि के आधार पर कैंटिन संचालित की जाये। कोचिंग संस्थान व अभिभावकों के पास विधार्थियों का नवीनतम आवास पता एवं मोबाईल नम्बर होने चाहिए। छात्रावासों व पीजी के आसपास नियमित पुलिस गश्त को प्रभावी बनाया जायेगा। विधार्थियों के लिये हैल्पडेस्क की व्यवस्था की जा सकती है। शराब व अन्य नशीले पदार्थो पर रोक हो। यदि कही भी उल्ल्घंन पाया जाये तो ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध आबकारी अधिनियम में कार्यवाही की जायेगी।
जिला कलक्टर ने बताया कि जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया जायेगा। जिसमें जिला कलक्टर अध्यक्ष होगें, जिला पुलिस अधीक्षक, एडीएम प्रशासन, अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक शहर, आयुक्त स्थानीय निकाय, सचिव नगरविकास न्यास, सीएमएचओ, नामित मनोचिकित्सक सदस्य होगें तथा जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव होगें। 

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