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Wednesday, 14 July 2021

पंजाब द्वारा राजस्थान को आने वाले सिंचाई पानी में प्रदुषण बंद करे पंजाब सरकार: सांसद निहालचन्द

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 गंगानगर । पंजाब प्रदेश की औद्योगिक ईकाइयों द्वारा राजस्थान को आने वाले पानी में प्रदुषण की अत्यधिक मात्रा और समझौते के अनुसार राजस्थान को हिस्से का पूरा पानी नहीं मिलने जैसे मुद्दों को लेकर लोकसभा की जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति द्वारा बुधवार पुनः चंडीगढ़ में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें जल संसाधन स्थायी समिति के अध्यक्ष डाॅ0 संजय जायसवाल, श्री अरुण सिंह, श्रीगंगानगर से लोक सभा सांसद श्री निहालचन्द समेत अन्य सदस्यों, पंजाब जलदाय विभाग और जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारीयों ने भाग लिया।

 यह बैठक मुख्य तौर पर पंजाब की औद्योगिक ईकाइयों और म्युनिसिपल कारपोरेशन द्वारा सतलुज.व्यास नदियों में बहाए जा रहे औद्योगिक अपशिष्ट, कूड़े कचरे के माध्यम से राजस्थान को प्रवाहित होने वाले जल से जुडी प्रदुषण की समस्याओं और पंजाब प्रदेश द्वारा राजस्थान को समझौते के अनुसार हिस्से का पूरा पानी नहीं दिए जाने के सम्बन्ध में थी। जिस पर श्रीगंगानगर से लोकसभा सांसद श्री निहालचन्द ने राजस्थान प्रदेश की ओर से अपनी बात रखते हुए समिति और पंजाब सरकार के अधिकारीयों का ध्यान गंदे पानी की आवक जैसे ज्वलंत मुद्दे पर आकर्षित करते हुए बताया कि पंजाब द्वारा राजस्थान प्रदेश को गंदे पानी की आवक बहुत पुराना मुद्दा है, जिसके स्थायी समाधान के लिए स्थानीय लोग और प्रशासन समेत हम सभी लोग पिछले कई सालों से प्रयासरत है, लेकिन पंजाब सरकार की उदासीनता के चलते ये समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। इस दूषित पानी की मार राजस्थान के 10 से ज्यादा जिलों के करोड़ों लोगों पर पड़ रही है, जिस वजह से यहाँ कैंसर, पीलिया, चर्म रोग और पेट संबंधी अन्य रोगों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
सांसद ने बताया कि एक सर्वे के अनुसार राजस्थान व पंजाब में पीने के 1 लीटर पानी में 30 माइक्रोग्राम युरेनियम पाया जाता है, जबकि यूरोपीय देशों में ये केवल 5 माइक्रोग्राम है । इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है, कि यहाँ के लोग कितने दूषित पानी का उपभोग कर रहे है और इसका आने वाले भविष्य पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा। दूषित पानी के मामले में पंजाब के 22 जिले और राजस्थान के 16 जिले डार्क जोन में है, जहाँ पानी में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक होने से ये पानी सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक हो जाता है।
 सांसद ने बताया कि नवम्बर 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के द्वारा पंजाब की नदियों में बढ़ते प्रदुषण पर सही ढंग से रोक ना लगा पाने के लिए पंजाब सरकार पर 50 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था, साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए थे कि जुर्माने की यह रकम पंजाब की औद्योगिक इकाइयों से वसूली जाएगी। पंजाब प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी पंजाब डायर्स एसोसिएशन पर 50 डस्क् क्षमता और ताजपुर रोड पर बनने वाले सी.ई.टी.पी. (काॅमन एफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) का काम समय पर पूरा नहीं होने के कारण 1 करोड़ 27 लाख रूपए का जुर्माना लगाया था, जोकि बुड्ढा नाले को प्रदुषण मुक्त बनाने के लिए बनना था।
 सांसद श्री निहाल चन्द ने बैठक में बताया कि जल बंटवारे के समझौते अनुसार गंग कैनाल को 3350 क्यूसेक पानी और राजस्थान कैनाल को 11000 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन पंजाब सरकार द्वारा ये पूरा हिस्सा भी राजस्थान को नहीं मिल रहा है, जिस कारण राजस्थान में पेयजल और सिंचाई संकट पैदा हो गया है। प्रदेश को प्रतिवर्ष कम मात्रा में पानी और प्रदूषित जल की समस्याओं से जूझना पड़ता है, जिसको प्रतिवर्ष विभिन्न माध्यमों से पंजाब सरकार के सामने उठाया जाता है, लेकिन आज तक इसका स्थायी समाधान करने में पंजाब सरकार असफल रही है।  
 सांसद ने बैठक में समिति के अध्यक्ष और पंजाब के अधिकारीयों से एक बार पुनः राजस्थान प्रदेश में पंजाब द्वारा दूषित पानी की आवक बंद करने और समझौते अनुसार हिस्से का पूरा पानी दिए जाने जैसे गंभीर मुद्दों के स्थायी समाधान की मांग करते हुए जल्द ही सकारात्मक कार्यवाही करने पर जोर दियाए साथ ही उन्होंने गंग कैनाल के पानी के शेयर को खखा हेड पर काउंट करने का सुझाव भी समिति को दिया। समिति के अध्यक्ष डाॅ0 संजय जायसवाल ने पंजाब सरकार के अधिकारीयों को इस दिशा में शीघ्र ही सकारात्मक और ठोस कार्यवाही हेतु निर्देशित किया है, साथ ही उन्होंने इसकी स्टेटस रिपोर्ट भी लोकसभा समिति और केंद्र सरकार को भेजने को कहा है।

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