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आज हर किसी के आस-पास है मंथरा-परम विदुषी डॉ. राधिका दीदी

हनुमानगढ़। जंक्शन की नई धान मण्डी में 27 फरवरी से चल रही श्री संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा वाचक परम विदुषी डॉ. राधिका दीदी जी हरीद्वार वाले ने अयोध्या कांड पर चर्चा करते हुए कहा कि अयोध्या कांड प्रेम और एकता के सूत्र में बांधने का प्रतीक है। अयोध्या कांड प्रेम से मिल-जुलकर रहने की सीख देता है। अयोध्या कांड लक्ष्मण के अपने भाई श्री राम चंद्र के प्रति अथाह प्रेम को दर्शाता है। भगवान श्री राम चंद्र जब वनवास जा रहे थे लक्ष्मण भी उनके साथ चौदह वर्ष के लिए वनवास को निकल गए। इसे कहते हैं भाई का भाई के लिए प्रेम। मगर आज भाईयों में प्रेम खत्म होता जा रहा है। लक्ष्मण ने अपने भाई राम चंद्र जी क ी सेवा में चौदह वर्ष न तो भोजन ग्रहण किया और न ही चौदह वर्षों तक वह एक दिन भी सोए। इन चौदह वर्षों तक बिना नींद लिए अपने भाई की सेवा में लगे रहे। परम विदुषी डॉ. राधिका दीदी जी ने श्री राम भवन में आयोजित दिव्य श्री राम कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं के विशाल जनसमूह के समक्ष प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब राम चंद्र अपने भाई लक्ष्मण और सीता के साथ वनवास से लौटे तो गुरु वशिष्ठ लक्ष्मण को गले लगा खूब रोए। राम चंद्र ने कारण पूछा तो उन्होंने लक्ष्मण की कुर्बानी का जिक्र करते हुए कहा कि इतने वर्ष तक लक्ष्मण बिना कुछ खाए ही रहे हैं। राम चंद्र ने गुरु वशिष्ठ को बोला कि मैं तो लक्ष्मण को नित्य प्रतिदिन अपने साथ कंद-मूल खाने को देता रहा था तो यह भूखे कैसे रहे तो गुरु वशिष्ठ जी ने प्रभु राम चंद्र को लक्ष्मण के भूखे रहने का वृतांत सुनाया कि कैसे लक्ष्मण कुछ न खाकर इतने वर्ष राम चंद्र जी की सेवा में लगे रहे।
आज हर किसी के आस-पास है मंथरा
परम विदुषी डॉ. राधिका दीदी जी ने कहा कि मंथरा सिर्फ कैकई के पास ही नहीं थी। बल्कि मंथरा आज कलियुग में भी है। हर वह इंसान जो किसी की चगुली करता है और किसी दूसरे के खिलाफ भडक़ाने का काम करता है वह मंथरा है। इसलिए ऐसे लोगों से बचें। जब तक मंथरा का घर में आगमन नहीं होता तब तक घर अयोध्या ही होता है। मगर जब घर में कोई मंथरा आ गई तो घर का विनाश तय है। इसलिए घर में किसी मंथरा को न आने दें। आज घर-घर में रावण बसे हुए हैं। दशहरा पर्व मौके  रावण के बुत को जलाया जाता है, मगर व्यक्ति अपने भीतर छिपे रावण का अंत कभी नहीं करता। जो व्यक्ति लोभ, मोह, अहंकार, काम व क्रोध के वशीभूत है वह रावण ही है।  आयोजन समिति के सदस्यों ने कहा कि 27 फरवरी से 7 मार्च तक दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक होगी और कथा का समापन 8 मार्च को सुबह 10 बजे होगा।



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