अब राजस्थान की विधानसभा में भूत-प्रेत का साया

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राजस्थान।  राजस्थान के विधायक विधानसभा भवन को अपशकुनी मानने लगे हैं। विधायकों की मांग है कि विधानसभा परिसर में यज्ञ हवन कराकर पूरे परिसर को गंगाजल से धोया जाए। विधायकों का कहना है 2,000 में विधानसभा नए भवन में स्थानांतरित हुई है। उसके बाद से कभी भी इस भवन में 200 विधायक एक साथ नहीं बैठे हैं। हर सत्र में किसी ना किसी विधायक की मौत हो जाती है या विधायक को जेल जाना पड़ता है।

ऐसी स्थिति में अब भूत प्रेतों को भगाने विशेष अनुष्ठान और शांति बनी रहे इसके लिए यज्ञ और हवन कराने की मांग जोर पकड़ गई है। यह भी कहा जा रहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत ने भी इस स्थान पर श्मशान और मजार होने की पुष्टि की थी। उनकी भी इच्छा थी, यहां पर पूजा-पाठ और अनुष्ठान कराकर शांति कराई जाए किंतु वह करा पाते,  इसके पहले ही सरकार चली गई।

विधायकों ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, और विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल से परिसर में यज्ञ हवन कराने तथा भूत-प्रेत का साया दूर हो, इसके लिए विशेष अनुष्ठान कराने का आग्रह किया है।

उल्लेखनीय है कि जयपुर का नया विधानसभा भवन 1999 में बनकर तैयार हुआ था। निर्माण के दौरान ही यहां पर लगभग आधा दर्जन मजदूरों की मौत विभिन्न कारणों से हुई । 2000 में नए भवन में विधानसभा की बैठकें होना शुरू हुई।  उसके बाद से लगातार विधायकों की मृत्यु का सिलसिला चल रहा है। 

विधानसभा में सत्तापक्ष के मुख्य सचेतक और वरिष्ठ भाजपा विधायक कालूराम गुर्जर के अनुसार नया विधानसभा भवन शमशान की भूमि पर बना है। जिसके कारण यहां पर भूत प्रेत घूम रहे हैं। गुर्जर ने मुख्यमंत्री से भूत प्रेतों को यहां से भगाने के लिए विशेष अनुष्ठान कराने का आग्रह किया है। ग्रहों की शांति के लिए अनुष्ठान कराने और ब्राह्मण भोज कराने की मांग भी विधायकों ने की है।



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