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Thursday, 10 January 2019

अतिक्रमणों के चलते अटका करोड़ों की लागत वाले महत्वपूर्ण एसटीपी का निर्माण



अतिक्रमणों के चलते अटका करोड़ों की लागत वाले महत्वपूर्ण एसटीपी का निर्माण 
- वार्ड नंबर 3 में स्थित गंदे पानी के गड्ढे के पास हो रहे है कब्जे 
- राजनैतिक सरंक्षण के चलते नगर परिषद् प्रशासन उदासीन 
- रसूखदार लोग मकान बना दे रहे है आगे किराये पर 


श्रीगंगानगर। पुरानी आबादी के वार्ड नंबर 3 में ईदगाह के पास स्थित गंदे पानी के गड्ढे में यूआईटी द्वारा 14 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से 10 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना प्रस्तावित है लेकिन अतिक्रमणों के चलते निर्माण पिछले एक साल से अटका हुआ है। जहां एक तरफ नागरिकों को मुलभुत सुविधाओं से वंचित रहते हुए गन्दगी और बिमारियों के माहौल में जीना पड़ रहा है वहीं दूसरी तरफ राजनैतिक संरक्षण प्राप्त लोगों द्वारा गंदे पानी के गड्ढे के पास लगातार अतिक्रमण किये जा रहे हैं। एक अन्य जगह गुरुनानक बस्ती स्थित 15 एमएलडी के प्लांट की लागत 16 करोड़ 60 लाख रुपए है। इन दोनों प्लांट का पानी पाइप लाइन के जरिए साधुवाली के पास लिंक नहर में डाला जाएगा। पाइप लाइन डालने पर 12 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। ईदगाह स्थित 10 एमएलडी के प्लांट का पानी पाइप लाइन के जरिए साधुवाली छावनी के पास तीन पुली वाली रोड के प्वाइंट पर मिलेगा। इन दोनों प्लांट का 25 एमएलडी पानी नहर में डालने के बाद यूआईटी द्वारा किसानों को सिंचाई के लिए बेचा जाएगा। लगातार बढ़ रहे इन अतिक्रमणों के चलते ये महत्वपूर्ण सरकारी योजना अधरझूल में है। रसूखदार लोगों ने  गंदे पानी के गड्ढे के पास अतिक्रमण करके मकान बना रखे है, जिन्हें आगे छोटे गरीब लोगों को किराये पर दे रखे है। जहां इन दिनों शहर के आम नागरिकों का ध्यान श्रीकरणपुर रोड स्थित चुंगी के पास अतिक्रमण कर बनाई गई दुकानों पर टिका हुआ है और नगर परिषद् अधिकारी भी लोगों का ध्यान बंटाने के लिए नगरपरिषद के उपसभापति के भवन के आगे अतिक्रमणरूपी थड़े की पैमाइश करने में जुटे हुए है। इसी का फायदा उठाते हुए कांग्रेस पार्टी से जुड़े नगर परिषद् के कुछ ठेकेदारों ने वार्ड नंबर 3 स्थित प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पास धड़ाधड़ अतिक्रमण कर पक्के मकान बनाने शुरू कर रखे हैं। राजनैतिक संरक्षण के चलते इन दिनों शहर में हर जगह अतिक्रमणों की बाढ़ सी आ गई है। सबसे मजेदार पहलु तो ये है कि नगर परिषद् के अधिकारीयों को सब भलीभांति मालूम है फिर भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है। चाहे शिकायत होने पर अतिक्रमण हो जाने के बाद में उन्हें नोटिस पर नोटिस देने की नौटंकी ही क्यों ना करनी पड़े। असल में नगर परिषद् प्रशासन को करोड़ों कि लागत से बनने वाले 10 एमएलडी क्षमता के इस महत्वपूर्ण सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रोजेक्ट की राह आसान करते हुए इन अतिक्रमणों को हटाना चाहिए लेकिन इन दिनों बरती जा रही घोर प्रशासनिक उदासीनता के चलते अतिक्रमणधारियों के हौंसले बुलंद है।

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