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Tuesday, 1 January 2019

बिना दुध वाले पशु भी उपयोगी हैः- जिला कलक्टर



श्रीगंगानगर। जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते ने कहा कि कोई भी पशु अनुपयोगी नही है। बिना दुध देने वाले पशुओं को कैसे उपयोगी बनाया जाये, इसके लिये जल्द ही एक कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा, जिसमे जिले के समस्त गौशाला संचालकों को आमंत्रित किया जायेगा। 
जिला कलक्टर मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाहॉल में जिले की गौशाओं के संचालकों की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पशुओं को बेसहारा छोड़ने का मुख्य कारण दुध नही देना है। जबकि बिना दुध वाले पशु भी उतने ही उपयोगी है, जितने दुध वाले पशु। गौशालाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ बनाने के लिये संचालकों को एक दिन की कार्यशाला का आयोजन करवाकर उनकी आमदनी बढ़ाने का रास्ता दिखाया जायेगा। जब अनुपयोगी पशु उपयोगी बनेगे तो कोई भी नागरिक पशुओं को नही छोडेगा। 
उन्होंने कहा कि शहरों में बेसहारा पशु घुमने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है तथा कई बार दुर्घटनाएं हुई भी है। इस समस्या से निजात पाने के लिये जिले भर में संचालित गौशालाओं में पशुओं को भेजा जायेगा। संचालकों को उनकी इच्छा के अनुसार कम से कम पांच से लेकर बीस पशु तक लेने होगें। उन्होंने कहा कि जब भी पशुओ को लेकर गौशाला के द्वार पर जाये तो पशु लेने से इंकार नही करें। सकारात्मक पहल करने से बहुत सारी समस्याओं का समाधान होगा। 
जिला कलक्टर ने कहा कि नागरिक पुण्य दान के लिये हरा चारा, गुड इत्यादि गायों को डालते है। खुले में सड़क पर चारा डालने से दुर्घटना को हम जन्म देते है। ऐसे में सड़क पर चारा डालने की परम्परा को बंद किया जायेगा। जो नागरिक अपने श्रृद्धा से गायो को चारा गुड खिलाना चाहे उन्हें गौशालाओं में ऐसी व्यवस्था की जायेगी कि वे आसानी से गायों को चारा गुड खिला सकेगें। जिले में कही भी गोचर भूमि उपलब्ध है तो ऐसी भूमि को महात्मा गांधी नरेगा में पशुओं को रखने के लिये तैयार की जा सकती है। 
जिला कलक्टर ने कहा कि श्रीगंगानगर जिला कृषि के क्षेत्रा में अपनी पहचान रखता है। कृषि कार्यों में अधिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों से भूमि की उर्वरा शक्ति को हम नष्ट करते जा रहे है। आने वाली पीढ़ियों के लिये उपजाऊ भूमि छोडने के लिये हमें गोबर व गौ मूत्रा का अधिकतम उपयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि अब जागरूकता का समय आ चुका है और हमें इस ओर कदम बढ़ाने चाहिए। गोबर व गौ मूत्रा को पहचानने की जरूरत है। गोबर अब गोबर न होकर एक तरह का सोना है। पशुओं के गोबर से गैस प्लांट स्थापित किया जा सकता है, बिजली बनाई जा सकती है। रसोई गैस के सिलेण्डर भरे जा सकते है। 

बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर सर्तकता गोपालराम बिरदा, नगरपरिषद आयुक्त अशोक असीजा, उपनिदेशक पशुपालन सहित जिले की शहरी व ग्रामीण क्षेत्रा में संचालित गौशालाओं के संचालकों ने भाग लिया। 

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