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Sunday, 24 March 2019

श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ के किसानों ने मंत्री को सडक़ पर घेरा,27 से करेंगे आंदोलन




श्रीगंगानगर। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष सरसों व  चना की सरकारी खरीद में अनेक प्रकार की बाधाएं खड़ी कर देने से नाराज श्रीगंगानगर जिले के किसानों ने आज शनिवार को प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री व  जिले के प्रभारी मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा को सडक़ पर ही घेर लिया। गोविंदसिंह डोटासरा श्रीगंगानगर में  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की 26 मार्च को सूरतगढ़ में होने वाली रैली की तैयारियों के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने आए थे। 

दोपहर को जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय मोती पैलेस में बैठक करने के बाद गोविंदसिंह डोटासरा जैसे ही बाहर आए, श्रीगंगानगर से निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ की अगुवाई में किसान संगठनों के नेताओं व किसानों ने उनको घेर लिया। गंगानगर किसान समिति, किसान संघर्ष समिति, अखिल भारतीय किसान सभा, एटा  सिंगरासर नहर निर्माण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों व  नेताओं ने गोविंदसिंह डोटासरा को जमकर खरी-खोटी सुनाई। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि भाजपा की पिछली सरकार ने श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलो में चना व सरसों सरकारी खरीद के लिए विशेष प्रकार की व्यवस्था की थी, क्योंकि इन दोनों जिलों में राज्य के अन्य जिलों की अपेक्षा ज्यादा उत्पादन होता है।मगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने विशेष व्यवस्थाओं को समाप्त करते हुए खरीद में नई बाधाएं खड़ी कर दी हैं। जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि पहले जहां एक किसान की लगभग सारी फसल की सरकारी खरीद हो जाती थी, लेकिन इस बार 6 माह पुराना ठेकानामा  लगाने और भामाशाह कार्ड पर सभी की खरीद का नियम हटा लेने से किसान अपनी फसल सरकारी मूल्य पर नहीं बेच पाएंगे। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा।


 विधायक राजकुमार गौड़ ने कहा कि  सरकार जिस नियम और व्यवस्था के तहत चना व सरसों की खरीद इस बार करने जा रही है, उससे एक किसान अपनी 25 प्रतिशत फसल ही बेच पाएगा। बाकी फसल उसे मंडी में कम दामों में बेचनी पड़ेगी । जिले के प्रभारी मंत्री से किसानों ने मांग की कि  प्रदेश की कांग्रेस सरकार नया नहीं कर सकती तो पिछली भाजपा सरकार के समय दोनों जिलों में खरीद के लिए लागू किए विशेष  व्यवस्थाओं को जारी रखने का ही एलान कर दे, इससे कम से कम किसानों को कुछ राहत अवश्य मिलेगी। प्रभारी मंत्री ने किसान प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि इस पर सरकार आज ही गंभीरता से विचार करेगी। किसानों ने मंत्री को चेताया है कि अगर 26 मार्च तक खरीद की विशेष व्यवस्था लागू नहीं की गई तो 27 मार्च से श्रीगंगानगर में पूरे जिले के किसान महापड़ाव डाल देंगे। 

गुरूबलपालसिंह संधू ने कहा कि इलाके के किसान चना व सरसों की पिछले साल की व्यवस्था के अनुसार ही खरीद करने की मांग लगातार कर रहे हैं, लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही। श्री संधू ने कहा कि केंद्र सरकार ने सरकारी समर्थन मूल्य पर कृषि जिंसों  की खरीद का  लक्ष्य  राज्य सरकार को दे दिया। खरीद किस नियम और व्यवस्था के तहत की जानी है,यह सब राज्य सरकार तय करती है। इसलिए यह आंदोलन राज्य सरकार के खिलाफ है। उधर, गंगानगर किसान समिति के प्रवक्ता संतवीरसिंह मोहनपुरा ने कहा कि किसानों का आंदोलन केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों के खिलाफ है। इस इलाके के किसानों को परेशानी में डालने के लिए केंद्र सरकार भी बराबर की जिम्मेवार है। किसान समिति के प्रवक्ता संतवीरसिंह मोहनपुरा ने कहा कि 27 मार्च को सुबह 10 बजे श्रीगंगानगर में कलेक्ट्रेट पर  धरना आरंभ किया जाएगा। यह धरना तब तक  चलेगा जब तक सरकार मांग पूरी नहीं करती। 

इससे पहले गुरुद्वारा सिंहसभा में किसानों की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मेवासिंह मौड ने की। माकपा के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं किसान नेता पृथीपाल सिंह संधू, अखिल भारतीय किसान सभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्योपतराम मेघवाल,गंगानगर किसान समिति के संयोजक रणजीत सिंह राजू,प्रवक्ता संतवीरसिंह मोहनपुरा, सहसंयोजक गैलेक्सी बराड, गोगी बराड़, गंग कैनाल प्रोजेक्ट के पूर्व चेयरमैन गुरूबलपालसिंह संधू, किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता एडवोकेट सुभाष सहगल, एटा सिंगरासर नहर निर्माण संघर्ष समिति के संयोजक राकेश बिश्नोई, वामपंथी नेता कालूराम थोरी, राकेश ठोलिया, विजय रिवाड आदि बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। बैठक करने के बाद किसानों ने जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय मोती पैलेस की तरफ कूच कर दिया। कांग्रेस कार्यालय के बाहर रोड पर ही मंत्री को किसानों ने घेर लिया। किसानों के साथ किए जा रहे भेदभाव को लेकर जमकर खरी-खोटी सुनाई।


किसानों के साथ आये विधायक गौड़
कांग्रेस से बागी होकर विधानसभा चुनाव लडक़र विधायक बने राजकुमार गौड़ आज किसानों द्वारा सरकार के खिलाफ किये गये प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल हुए। गुरुद्वारा सिंह सभा में बैठक करने के बाद जैसे ही किसानों ने मोती पैलेस-कांग्रेस कमेटी कार्यालय की तरफ कूच किया, विधायक गौड़ रास्ते में उनके साथ हो गये। मोती पैलेस पर पहुंचकर किसान जब सरकार की मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे, तब विधायक गौड़ उनके साथ ही खड़े थे। मुर्दाबाद के नारे लगने की आवाजें सुनकर पैलेस में मौजूद लगभग सभी कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता बाहर आ गये।


 मंत्री गोविन्दसिंह डोटासरा ने किसानों के बीच जाकर उनकी बात सुनी। इस पूरे दिलचस्प परिदृश्य में खास बात यह रही कि विधायक गौड़, किसानों के इस मुद्दे पर उनके साथ खड़े दिखाई दिये, जबकि उन्होंने कांग्रेस की प्रदेश सरकार को अपना बिना किसी शर्त के समर्थन दे रखा है। करीब 48 वर्ष कांग्रेस में रहे विधायक गौड़ आज कांग्रेस के अपने पुराने साथियों-कार्यकर्ताओं के सामने दूसरे पक्ष के रूप में मौजूद रहे। इस पर वहां लोगों ने खूब चुटकियां लीं। चर्चा रही कि बेशक विधायक गौड़ अब कांग्रेस में नहीं हैं, लेकिन वे कांग्रेस के आसपास ही मौजूद रहते हैं। उनकी मजबूरी है कि वे सीधे कांग्रेस के कार्यक्रमों में नहीं जा सकते। आज भी वे मोती पैलेस के बाहर कॉर्नर की एक दुकान पर ही काफी देर तक खड़े रहे, जब तक मंत्री व अन्य नेता वहां से विदा नहीं हो गये। 

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