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Wednesday, 1 July 2020

डीएवी स्कूल ने शिक्षकों को निकाला तो धरने पर बैठे शिक्षक,बेरोजगारी की मार से परिवार भी आया संग


प्रिंसिपल रिपोर्ट एक्सक्लूसिव से बोली नहीं होगा अन्याय

सात दिन के आश्वासन के बाद धरना-प्रदर्शन किया खत्म

हनुमानगढ़(कुलदीप शर्मा)। कोरोना वायरस के प्रसार के साथ ही लगभग हर हफ्ते किसी न किसी क्षेत्र से हजारों कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी देने, नौकरियों से निकालने, वेतन में भारी कटौती की खबरें लगातार मिल रही हैं। ये बात अलग है की अभी सारे बेरोजगार हुए लोग खुद की नौकरी बचाने और परिवार को पालने की मानसिक दबाब में है। इसी दबाब के चलते अभी बेरोजगार हुए लोग खुल कर सामने नहीं आ पाए है। दरअसल हम ऐसी बात इसलिए कर रहे है क्यूंकि ऐसा ही एक मामला राजस्थान के हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर देखने को मिला है। 

क्या है मामला  
बुधवार को अचानक खबर आई की कुछ शिक्षक हनुमानगढ़ में स्थित डीएवी स्कुल के आगे अपनी नौकरी बचाने की कोशिश में धरना-प्रदर्शन कर रहे है। मामले की बात करे तो सामने आया की हनुमानगढ़ टाउन के डीएवी स्कूल द्वारा कोराना वैश्विक महामारी के दौरान शिक्षकों को नौकरी से निकालने के विरोध में शिक्षकों ने बुधवार को विद्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर विरोध दर्ज करवाया। प्राप्त जानकारी के अनुसार डीएवी स्कूल द्वारा 8 शिक्षकों को नौकरी से निकाला गया है। शिक्षकों ने धरने-प्रदर्शन को कवरेज करने गए मीडियाकर्मियों को बताया कि भारत सरकार के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए  किसी भी शिक्षण संस्थाओं द्वारा कोरोनाकाल के दौरान अपने संस्थान से नही निकालने के निर्देश जारी किये गये है। लेकिन बावजजूद इसके शिक्षकों को इस संकट की घड़ी में निकाला जा रहा है जिससे उनके परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है। शिक्षिका रेखा रानी, अमीता ने अपने परिवार व साथियों के साथ शिक्षण संस्था के बाहर धरना प्रदर्शन किया गया। 

वार्ता हुई लेकिन सात दिन का माँगा समय
मामले को बढ़ता देख डीएवी स्कुल प्रबंधन ने शिक्षकों से वार्ता का न्योता भेजा जिसके बाद दोनों पक्षों में वार्ता का दौर चला। वार्ता का तो ज्यादा नहीं पता चल पाया लेकिन इतना जरूर सामने आया की डीएवी स्कुल प्रिंसिपल ने मामले के निस्तारण को लेकर सात दिन का समय माँगा है। जिस पर दोनों पक्षों में फिलहाल के लिए रजामंदी दिखाई दी। जानकारी के अनुसार मौके पर अधिवक्ता पराग जैन व प्रद्युमन सिंह ने स्कूल की प्राचार्य से वार्तालाप किया। 

स्कुल प्रबंधक बोला हमने किसी को नहीं निकाला
डीएवी स्कुल प्रबंधक से जब इस संबंध में दूरभाष पर बात हुई तो स्कुल प्रिंसिपल ने साफ़-साफ़ इस बात से इनकार कर दिया गया की उन्होंने किसी भी अध्यापक को स्कूल से नहीं निकाला है। प्रिंसिपल ने बताया की स्कुल प्रबंधन ने सभी शिक्षको को 16 मई तक पूरी तनख्वाह दी है। कोरोना काल के बावजूद भी स्कुल प्रबंधन ने शिक्षिकों का साथ देते हुए उनकी तनख्वाह में किसी प्रकार की कोई कटौती नहीं की गयी है। ऑनलाइन क्लासेस के बारे में पूछने पर प्रिंसिपल ने ये बताने से तो इनकार कर दिया की कितने शिक्षक ऑनलाइन क्लासेस में पढ़ाएंगे लेकिन इतना जरूर बताया की दो शिक्षकों को छोड़कर सभी शिक्षकों ने ऑनलाइन क्लासेस में पढ़ाने पर हामी भरी है। प्रिंसिपल से प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों के आर्थिक संकट की बात की तो प्रिंसिपल ने आश्वस्त किया की अभी हमारी स्कुल प्रबंधन की माली हालात कोरोना काल की वजह से कुछ ठीक नहीं है लेकिन हम उन सभी शिक्षकों को जोइनिंग देने का आश्वसन देते है।  

शिक्षकों के धरने और प्रिंसिपल के जवाब से क्या समझे
दरअसल मामला स्कूल से शिक्षकों को निकालने से जुड़ा है तो उसमें एक पक्ष का कहना है कि उन्हें निकाला जा चुका है लेकिन वहीं स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि ये स्कूल प्रक्रिया का हिस्सा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग सभी निजी शिक्षण संस्थान में साल के मध्य छुट्टियों से पहले शिक्षकों को  रिलीव किया जाता है और उसके बाद उन्ही शिक्षकों को पुनः वापिस स्कूल में प्रवेश दे दिया जाता है हालांकि इस व्यवस्था को लेकर सूत्र ये भी कहते है कि ये व्यवस्था लगभग ईमानदारी पूर्ण निभाई भी जाती है। अभी इसी मामले में भी कुछ ऐसा ही माजरा सामने आ रहा है। अब शिक्षकों को जब डर सताने लगा कि अब शायद हम वापीस जॉइन ना कर पाएंगे तो इस बात से डरे ओर बेरोजगारी से मानसिक परेशान हुए शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन किया। हालांकि फिलहाल स्कूल प्रिंसिपल ने सभी को आश्वस्त जरूर किया है कि वो इनको पुनः स्कूल में शिक्षकों के रूप में प्रवेश देंगे लेकिन प्रवेश देंगे कब ये कमेटी के निर्णय पर छोड़ा गया है। कमेटी क्या निर्णय करेगी ये समय पर निर्भर है।

रिपोर्ट एक्सक्लूसिव व्यू

कोरोना काल में जहां एक तरफ पुरे प्रदेश में नहीं अपितु देश में भी आर्थिक मंदी ला दी है तो वहीं देश भर में उद्योग-धंधे सभी चौपट हो गए है इस दौरान बेरोजगार हुए लोग मानसिक प्रताड़ना झेल रहे है। सभी कम्पनियों,संस्थाओं, समितियों को अपने कर्मचारियों को निकालने से पहले उनके व उनके परिवार को मानसिक रूप से मजबूत करने और जब तक दूसरी नौकरी नहीं मिल जाये तब तक जीवन यापन करने के लिए भत्ता देने पर विचार करना चाहिए ताकि देश मे बेरोजगार हुए व्यक्ति कोई गलत कार्य और गलत संगत में ना पड़े। हमे इस समय विपरीत परिस्थितियों के विरुद्ध संघर्ष करना होगा।

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