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Friday, 9 October 2020

लाइलाज बीमारी नहीं कुष्ठ रोग: डॉ. अरूण कुमार

- चिकित्सा विभाग के प्रयास से रोग मुक्त हुआ चर्म रोगी 

हनुमानगढ़। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से एक रोगी चर्म (कुष्ठ) रोग से मुक्त हो गया है। लगभग 6 माह के दवा सेवन के बाद वह इस रोग मुक्त हो पाया। 
सीएमएचओ डॉ. अरूण कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा कुष्ठ रोगी को ढूंढने का अभियान निरंतर जारी है। इसी के तहत मार्च 2020 में स्वास्थ्य टीम को भादरा के एक गांव में श्यामलाल (परिवर्तित नाम) में चर्म रोग होने का अंदेशा हुआ। उसके शरीर पर कुछ जगहों पर दाग थे, जिनमें सूनापन भी था। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) भादरा में श्यामलाल की जांच करने पर पता चलता कि उसमें चर्म रोग की शुरूआत हो रही है। श्यामलाल की काउंसलिंग के बाद उन्हें टाउन स्थित एमजीएम जिला अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी सम्पूर्ण जांच निःशुल्क की गई। जांच उपरांत उन्हें दवाइयां दी गई तथा ताकीद की गई कि दवाइयों के नियमित सेवन से वह कुछ ही माह में रोग मुक्त हो जाएगा। श्यामलाल ने नियमित दवा का सेवन किया। सितम्बर माह में श्यामलाल का दोबारा जांच की गई, जिसमें पता चला कि वह चर्म रोग से मुक्त हो चुका है। सीएमएचओ डॉ. अरूण कुमार ने आज श्यामलाल को कुष्ठ रोग मुक्त प्रमाण-पत्र सौंपा। इसके साथ-साथ उसे एक कम्बल एवं एक फुटवीयर (जूते) भी दिए गए। 
इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. अरूण कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोग कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि 6 से 12 महीने के नियमित इलाज से कुष्ठ रोग को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। जिले में कुष्ठ रोग के प्रति लोगों को जागरुक करने समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा नियमित चर्म रोग के रोगियों की खोज की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कुष्ठ रोग को लेकर अनेक तरह की शंकाएं है जबकि यह एक तरह की बीमारी है, जो समय और सही इलाज से पूरी तरह से ठीक हो सकती है। उन्होंने कहा कि हमारा शरीर भिन्न संक्रमण को भिन्न प्रकार से प्रत्युत करता है। यह एक व्यक्तिगत क्षमता है जो बीमारी या संक्रमण का प्रतिरोध करती है, जिसे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के नाम से जाना जाता है। दूसरी बीमारियों की ही तरह कुष्ठ रोग का कारण भी जीवाणु ही है, जो कि माइकोबैक्टिरिअम लेप्राई और माइकोबैक्टेरियम लेप्रोमेटॉसिस जैसे जीवाणुओं से होता है। उन्होंने बताया कि वैसे तो यह बीमारी स्थाई होती है, इसलिए समय रहते इसकी पहचान जरूरी है और नियमित अंतराल के दवा सेवन से इसे खत्म किया जा सकता है। 

कुष्ठ रोग से पीड़ित के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न करें 
सीओ-आईईसी मनीष शर्मा ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को चमड़ी के रंग के फीकापन लगे, तो उसे नजदीकी अस्पताल जाकर इसकी जांच करवा लेनी चाहिए। सरकारी चिकित्सा संस्थानों पर इसकी जांच व दवाई मुफ्त मिलती है। समय पर इलाज करवाने से यह रोग पूर्णतया ठीक हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस रोग के उपचार में लापरवाही ना बरती जाए, वरना अंग विकृति आ सकती है। उन्होंने कहा कि अगर आस-पड़ोस में किसी व्यक्ति को इस तरह के दाग धब्बे हों तो आशा, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, डॉक्टर से सम्पर्क कर उसकी जांच करवाएं। यदि कोई व्यक्ति कुष्ठ रोग से पीड़ित है, तो उसके साथ किसी भी तरह का भेदभाव न करें एवं जहां तक हो सके उसकी हर प्रकार से सहायता करें। 

कार्यकम के उद्देश्य:
- कुष्ठ रोग का प्राथमिक अवस्था में पहचान कर शीघ्र पूर्ण उपचार करना।
- संक्रामक रोगियों का शीघ्र उपचार कर संकमण की रोकथाम करना।
- नियमित उपचार द्वारा विकलांगता से बचाव।
- विकृतियों का उपचार कर रोगियों को समाज का उपयोगी सदस्य बनाना।
- स्वास्थ्य शिक्षा द्वारा समाज में इस रोग के सम्बन्ध में फैली गलत अवधारणाओं को दूर करना। 

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