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लिंग पूर्वाग्रह मुक्त समाज पर वेबिनार का आयोजन’

श्रीगंगानगर,। विश्वविद्यालय महारानी महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा सोमवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय ‘लिंग पूर्वाग्रह मुक्त समाज‘ विषय पर वेबिनार का शुभारंभ किया गया।

महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. संगीता गुप्ता ने उपस्थित सभी अतिथिगणों का स्वागत करते हुए कहा कि इस वेबिनार में भारत के 21 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 11 विदेशी संस्थानों जैसे एनएलयू भोपाल, आईआईटी दिल्ली, मोटफोर्ट काॅलेज बैंगलूरू, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, सोफिया काॅलेज फाॅर वीमेन मुंबई, फर्गूसन काॅलेज पुणे, यूनिवर्सिटी आॅफ ढाका बांग्लादेश, साउथ एशियाई इंस्टिट्यूट आॅफ मैनेजमेंट नेपाल, विला काॅलेज मालदीव्स, परडू यूनिर्विसिटी यूएसए ली काॅर्डेल ब्लू पेरिस सहित 182 काॅलेजों और विश्वविद्यालयों से 1231 छात्रों और संकाय सदस्यों के पंजीकरण प्राप्त हुए है।
इस लाइव प्रोग्राम को देखने के लिए इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिष्ठित संस्थानों का जुड़ना एक महान संतुष्टि और खुशी का प्रतीक है। मनोविज्ञान विभाग की स्थानीय प्रमुख डाॅ प्रेरणा पूरी ने वेबिनार के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि लैंगिक पूर्वाग्रह ग्रस्त समाज मानव जीवन के लिए एक अभिशाप है। समाज को इस अभिषाप से मुक्त करने के लिए हमें महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन लाना होगा। डाॅ. प्रेरणा पुरी ने इस वेबिनार के विभिन्न सत्रों में आयोजित होने वाले विषय के बारे में अवगत कराया जैसे- लिंग भेद के पर्यावरणीय मूल, जेंडर एंड्राॅजिनी एवं आधुनिक नारीवाद।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता के रूप में रूवा की पूर्व अध्यक्ष प्रो. बीना अग्रवाल ने अपने भाषण में बताया कि लिंग पूर्वाग्रह वैदिक काल से वर्तमान समय में कैसे आया। इसकी ऐतिहासिक यात्रा में वेद, पुराण, रामायण, महाभारत का उदाहरण देते हुए इसकी (लिंग पूर्वाग्रह) उत्पत्ति को दर्शाया। ऐतिहासिक समय में भी स्त्राी के ऊपर काफी प्रतिबंध लगाए गए थे। महिलाओं को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कोई अधिकार नहीं दिया गया था। पौराणिक समय में भी मर्दो पर कोई प्रतिबंध नहीं थे और लोगों का यह भी मानना था की पत्नी, पुत्री और दास का कोई अस्तित्व नहीं है। वेबिनार के दूसरे मुख्य वक्ता के रूप में श्री दीपक कश्यप ‘‘लिंग‘‘ शब्द के वर्तमान आदि को बताया और कहा कि विभिन्न लिंगों पर विभिन्न समाज के विचार कैसे है। उन्होंने हमें लिंग भेद पर कुछ सिद्धांत दिए और कहा कि हमारे वर्तमान समाज में यदि कोई दूसरों को प्रोत्साहित करता है तो पुल्लिंग शब्द का उपयोग किया जाता है और यदि हम किसी को हतोत्साहित करना चाहते हैं तो आमतौर पर स्त्रीलिंग शब्द का उपयोग किया जाता है। आज हम एक पुरूष प्रधान समाज में रह रहे है। इस वेबिनार की संयोजक डाॅ. उमा मित्तल और सह संयोजक ज्योति रही।
प्रथम सत्रा के समाप्ति पर फेस पेटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें प्रथम स्थान पर कृति शर्मा रहीं।
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