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Wednesday, 8 September 2021

एडस से ग्रसित व्यक्ति के बताये अधिकार


हनुमानगढ़।  राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर द्वारा प्रेषित एक्शन प्लान 2021-22 के क्रियान्वयन बाबत अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) हनुमानगढ़ श्री संजीव कुमार मागो के निर्देशानुसार सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश) श्रीमती संदीप कौर की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से शिविर का आयोजन प्रशिक्षु न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री दीपिका रामावत द्वारा किया गया।

                               उक्त वर्चुअल शिविर में प्रशिक्षु न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री दीपिका रामावत द्वारा एचआईवी के बारे में विस्तार से बताया गया कि एचआईवी एडस से पीडि़तों हेतु ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएंशी वायरस एंड एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंशी सिंड्रोम (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) बिल, 2017 बनाया गया है। यह एक्ट एचआईवी कम्यूनिटी के लिए कानून मजबूत करने के लिए पास किया गया है, इससे इस समुदाय के लोगों को लीगल सैंक्टिटी यानी कानूनी शुद्धता यानी न्याय का अधिकार दिया जाएगा उक्त रोग से ग्रसित व्यक्ति के साथ आम व्यक्ति जैसा सामान्य व्यवहार किया जाना चाहिए जो अधिकार आम व्यक्ति के पास सुरक्षित है वे अधिकार एडस से ग्रसित व्यक्ति को भी प्राप्त है। यह भी बताया गया कि न्यायालय द्वारा भी ऐसे आदेश पारित किये गये है कि जो व्यक्ति एडस से पीडि़त है तो उस व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान गोपनीय रखी जावेगी जिस जगह पर व्यक्ति कार्य करता है वहां पर भी उसके एडस से पीडि़त होने के तथ्य को गोपनीय रखे जाने के आदेश भी न्यायालय द्वारा जारी किये गये है। इस एक्ट के तहत एचआईवी पीडि़त नाबालिग को परिवार के साथ रहने का अधिकार मिलता है और उनके खिलाफ भेदभाव करने और नफरत फैलाने से रोकता है।
                                  इस एक्ट के तहत मरीज को एंटी.रेट्रोवायरल थेरेपी का न्यायिक अधिकार मिल जाता है, इसके तहत हर मरीज को एचआईवी प्रिवेंशन, टेस्टिंग, ट्रीटमेंट और काउंसलिंग सर्विसेज का अधिकार मिलेगा। साथ ही इस एक्ट के तहत राज्य और केंद्र सरकार को ये जिम्मेदारी दी गई है कि मरीजों में इंफेक्शन रोकने और उचित उपचार देने में मदद करे, सरकारों को इन मरीजों के लिए कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने को भी कहा गया है। इस बिल में इन मरीजों के खिलाफ भेदभाव को भी परिभाषित किया गया है, इसमें कहा गया है कि मरीजों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य प्रॉपर्टी, किराए पर मकान जैसी सुविधाओं को देने से इनकार करना या किसी तरह का अन्याय करना भेदभाव होगा, इसके साथ ही किसी को नौकरी, शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधा देने से पहले एचआईवी टेस्ट करवाना भी भेदभाव होगा। इसमें कहा गया है कि किसी भी मरीज को उसकी सहमति के बिना एचआईवी टेस्ट या किसी मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

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