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Wednesday, 6 October 2021

राज्य सरकार द्वारा किसानों के असंतोष को दूर करने का हरसम्भव प्रयास किया जा रहा है- मुख्य अभियंता ( उत्तर)

 राज्य सरकार द्वारा किसानों के असंतोष को दूर करने का हरसम्भव प्रयास किया जा रहा है- मुख्य अभियंता ( उत्तर)

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता( उत्तर) श्री अमरजीत मेहरड़ा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी जानकारी

हनुमानगढ़, 06 अक्टूबर। जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ( उत्तर), हनुमानगढ़ श्री अमरजीत मेहरड़ा ने बताया कि हिमाचल और पंजाब के क्षेत्रों में इस बार हुई अल्प वर्षा की वजह से पोंग एवं रणजीत सागर बांध में पानी की कम आवक का असर इंदिरा गांधी नहर परियोजना पर भी हुआ है। राजस्थान को रावी व्यास नदियों का पानी मुख्यतः पोंग बांध और रणजीत सागर बांध से मिलता है और इसकी मात्रा का निर्धारण भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड द्वारा किया जाता है जो उपलब्ध जल को राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में आवंटित करता है। सितम्बर 20, 2021 को हुई भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड की बैठक के समय पोंग बांध में मात्र 58 प्रतिशत पानी का भराव था जबकि रणजीत सागर में भराव क्षमता के मुकाबले 59.2 प्रतिशत ही पानी था। पोंग बांध का जल स्तर 1352.82 फीट था जो उसके औसत भराव स्तर 1376.11 फीट से काफी कम था वहीं रणजीत सागर का भराव स्तर 507.91 मीटर था जो औसत भराव स्तर 514.88 मीटर से काफी कम था।

श्री मेहरड़ा ने बतााय कि सितम्बर 20, 2021 को बोर्ड की बैठक में राजस्थान हेतु मई 2022 तक के लिए कुल 13.458 लाख क्यूसेक डे पानी का आवंटन किया गया है। जिसमें से 9.396 लाख क्यूसेक डे इंदिरा गांधी नहर परियोजना को दिया गया है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना दस जिलों के 1.75 करोड़ लोगों को पीने के पानी और अन्य आवश्यकताओं के साथ छः जिलों की 16.17 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करती है। ऐसे में बांधों में उपलब्ध जल और आने वाले महीनों में इन बांधों में पानी की संभावित आवक के साथ साथ निकट भविष्य में अनिवार्य जल आवश्यकताओं की गणना कर सिंचाई जल वितरण योजना का निर्धारण किया गया है। रबी की फसल के लिए समयबद्ध पानी की उपलब्धता के लिए सिंचाई हेतु तीन बारियों में जल वितरण किया जा रहा है।

श्री मेहरड़ा ने बताया कि वर्तमान में कुछ किसान समूहों द्वारा पानी की उपलब्धता पर असंतोष प्रकट किया जा रहा है। वर्ष 2004-05 अक्टूबर माह में उपलब्ध पानी का आंकलन कर तदनुसार तीन बारी पानी का निर्धारण किया गया था। तत्पश्चात आगामी महीनों में बांधों में पानी की अनुमानित आवक के मुकाबले लगभग 70 प्रतिशत अधिक पानी आने पर अतिरिक्त जल उपलब्धता की समीक्षा कर पुनःरोटेशन प्रोग्राम निर्धारित कर पांच बारी पानी दिया गया। वर्ष 2009-10 में भी मानसून पश्चात बांधों में पानी की अनुमानित आवक के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक पानी आने पर तीन बारी पानी दिया गया। आंदोलनरत किसानों को राज्य सरकार वास्तविक स्थिति से अवगत करा कर सहयोग की उम्मीद कर रही है।

उन्होने बताया कि सिंचाई जल वितरण योजना के अनुसार वितरण प्रक्रिया शुरू होने के कारण योजना में किसी तात्कालिक बदलाव की संभावना नहीं है लेकिन सरकार द्वारा किसानों को आश्वस्त किया गया है कि आने वाले महीनों में संबंधित बांधों में पानी की आवक बढ़ती है तो दिसम्बर जनवरी में जल वितरण योजना का पुनः मूल्यांकन कर बदलाव किया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि किसान स्थिति का आंकलन करते हुए सरकार द्वारा किए गए जल प्रबंधन से सहमत होंगे।

मु्ख्य अभियंता ने बताया कि जल वितरण योजना में सभी पक्षों की आवश्यकताओं का ध्यान रखा गया है साथ ही आगामी ग्रीष्म ऋतु तक पश्चिमी राजस्थान में पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने के प्रयास किये गये हैं। इस वर्ष पानी की उपलब्धता कम होने पर भी संयमित उपयोग से निकट भविष्य में होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है। राज्य सरकार द्वारा किसानों के असंतोष को दूर करने का हरसम्भव प्रयास किया जा रहा है। 

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