क्या रफाल की वजह से छुट्टी नहीं हो रही मनोहरजी की ? आरोप गलत हो !


(जी.एन.एस) पर्यटन स्टेट गोवा में इन दिनों राजनितिक उठांगपथांग चल रही है। वजह मुख्यमंत्री मनोहर परिरकर की लम्बी बीमारी और खुद गंभीर बीमार फिर भी दो बीमार मंत्रियो की छुट्टी और विपक्ष कोंग्रेस द्वारा आरोप की सीएम मनोहर जब रक्षा मंत्री थे तब विवादी रफाल विमान का सौदा हुवा था और वे सौदे के बारे में जानते है इसलिए भाजपा और केंद्र सरकार मनोहर पिछले ७ महीनो से अस्पतालों में भर्ती होने के बावजूद उन्हें पद से दूर करने की हिमत नहीं दिखा रहे है। हो सकता है की कोंग्रेस का यह आरोप गलत हो लेकिन इस बात से भाजपा या केंद्र सरकार इनकार नहीं कर सकती की पर्रीकर जब केंद्र में रक्षा मंत्री थे तब रफाल विमान का सौदा फ्रांस की कम्पनी से हुवा था। उसके बाद उन्हें गोवा चुनाव बाद सरकार बचाने के लिए ताबड़तोड़ दिल्ही से गोवा भेजे गये थे। हालांकि कोंग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने तो यह दावा किया था की जब प्रधानमंत्री रफाल विमान पर डील कर रहे थे तब मनोहरजी गोवा में मछली खरीद रहे थे।

राजनीति में आरोप प्रत्यारोप तो लगते ही रहते है लेकिन जहा तक छोटे से राज्य गोवा के प्रशाशन का है तो बीमार सीएम की वजह से और वह भी पिछले सात महीनो से विदेश में- देश में अलग अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे है। इश्वर करे वे जल्दी अच्छे हो जाय लेकिन जो खुद बीमार है वह दुसरे बीमार दो मंत्रियो को मंत्रिमंडल से निकाले तो सवाल तो होंगा ही की ऐसा क्यों ? जिन मंत्रियो को निकाला वे भी यह सवाल का उत्तर मांग सकते है। लेकिन जवाब मिलने की उम्मीद कम है। जो सीएम दिनों तक अस्पताल में हो वे सरकार कैसे चलाएंगे ? प्रशाशन को हर महत्वपूर्ण मामलो में उनकी सहमती या हस्ताक्षर की जरुरत रहती है। उनकी बिमारी संगीन है जिसका इलाज वे विदेश में करवाकर आने के बाद फिर बीमार हो गये और इन दिनों दिल्ही की एइम्स अस्पताल में भर्ती है।

गुजरात के तत्कालीन सीएम आनंदीबेन पटेल को उम्र की वजह से यानी की ७० साल से ज्यादा उम्र के नेता को रिटायर होने का या करने का नियम भाजपा ने बनाया था और उसके चलते उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। मनोहरजी का मामला उम्र का नहीं किन्तु गंभीर बिमारी का है। उन्हें पद से दूर कर किसी दुसरे नेता को सरकार की कमान देनी चाहिए। तामिलनाडू में तो जयललिता को जेल हो गई तब उनकी तस्वीर सीएम की कुर्सी पर रख कर उनके मंत्री सरकार चलाते थे। जो की व्यक्ति पूजा ही थी और लोकतंत्र में इस तरह की भक्ति चल नहीं सकती। मनोहर जी को या उनके परिवार से पार्टी यह कह कर उन्हें पद से दूर कर सकती है की जब वे ठीक हो जाय तो फिर से सीएम बना दिए जायेंगे। ताकि किसी और को सीएम बनाया जाय। बिना सीएम के स्टेट कब तक चलेंगा ? यदि चल सकता है तो चलाइये लेकिन इतना कुछ होने के बावजूद यदि मनोहरजी को पद पर बनाए रखेंगे तो सवाल तो उठेंगे और उसमे रफाल विमान वाला सवाल भी उठ सकता है। बीमार मंत्री की छुट्टी लेकिन बीमार सीएम की छुट्टी? नको रे बाबा…!

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