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Wednesday, 4 May 2022

कांच, धातु मिश्रित चाईनीज मांझे के उपयोग पर प्रतिबंध

 कांच, धातु मिश्रित चाईनीज मांझे के उपयोग पर प्रतिबंध

श्रीगंगानगर,। लोक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं पशु, पक्षियों की जान के चलते तथा विद्युत प्रसारण को बाधा रहित बनायें रखने हेतु जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्रीमती रूक्मणि रियार सिहाग ने दण्ड संहिता 1973 की धारा 144 के अन्तर्गत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए लोक स्वास्थ्य व विद्युत संचालन बनाए रखने एवं पक्षियों के लिए बडे पैमाने पर खतरा बन चुके धातु निर्मित मांझा की थोक एवं खुदरा बिक्री तथा उपयोग श्रीगंगानगर जिले की राजस्व सीमा, क्षेत्राधिकार में निषेध व प्रतिबंधित करने के आदेश जारी किए है।
 लोगों द्वारा पतंग उड़ाने में कांच, धातु मिश्रित चाईनीज मांझे, सिन्थेटिक धागे का उपयोग करने से पतंग उडाने से केवल बडी संख्या में पक्षी घायल होते है, बल्कि सड़क पर पैदल चलने वाले और दुपहिया वाहन पर चलने वाले राहगीरों का जीवन भी संकटापन्न होते है। इस तरह के पशु-पक्षी और मानव जीवन के लिए खतरनाक मांझे के निर्माण व उपयोग पर प्रभावी रोकथाम के उपाय किया जाना आवश्यक है। लोग भारी संख्या में पतंग उड़ाते है, जिससे यह खतरा ओर अधिक बढ जाता है, ऐसे मांझे के क्रय-विक्रय, भण्डारण व उपयोग को निषेध किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
आदेशानुसार चाईनीज मांझा विभिन्न धातुआंे के मिश्रण से निर्मित होने से धारदार तथा विद्युत का सुचालक होता है, जिसके उपयोग के दौरान दोपहिया वाहन चालकों तथा पक्षियों को अत्यधिक जान-माल का नुकसान होना संभव है, साथ ही विद्युत सुचालक होने के कारण विद्युत तारों के सम्पर्क में लाने पर विद्युत प्रवाह होने से पतंग उड़ाने वाले को भी नुकसान पहंुचना एवं विद्युत विद्युत सप्लाई में बाधा उत्पन्न होना भी संभाव्य है। इस समस्या व खतरे के निवारण हेतु यह आवश्यक है कि धातु निर्मित मांझा के उपयोग एवं विक्रय को निषेध किया जाए। उन्होने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय राज. खण्डपीठ जयपुर द्वारा डी.वी. सिविल रिट पिटीशन में जारी दिशा निर्देश एवं माननीय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली द्वारा प्रकरण संख्या 384/2016 में पारित आदेश 14 दिसम्बर 2016 में भी पतंग उडाने के लिए हानिकारक सामग्री से बने धागे के उपयोग को परमिट नहीं किया है।
यह आदेश 31 जुलाई 2022 की मध्य रात्रि तक प्रभावी रहेगा। आदेशों की अवहे्लना या उल्लंघन किए जाने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के तहत दण्डित करवाया जाएगा।

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