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ग्रामवासियों ने किया सादुलशहर पुलिस व् मिडिया का सम्मान

बींझबायला विनोद सोखल
सादुलशहर,अमरगढ़ की बालिका को सकुशल परिजनों के सुपुर्द करने पर ग्रामवासियों ने करड़वाला ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती हरदीप कौर बराड़ की अध्यक्षता में सादुलशहर थाना प्रभारी पुलिस वृत्त निरीक्षक भूपेन्द्र सोनी, उप निरीक्षक सुरेश कस्वां सहित पुलिस स्टाफ को गांव के राजकीय विद्यालय में आयोजित सम्मान कार्यक्रम में सम्मानित किया। गांव अमरगढ के सैंकड़ो ग्रामीणों ने मालायें पहनाकर, गुलदस्ते भेंट कर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि 16 फ़रवरी को गांव अमरगढ़ से अपहृत हुई बच्ची जसमीत कौर को तलाशने में सादुलशहर पुलिस ने दिन रात एक कर बच्ची को सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द किया जिसके चलते ग्रामवासियों के साथ-साथ इलाके के लोगों ने सादुलशहर पुलिस व् मिडिया का आभार जताया। - इस दौरान सादुल शहर थाना प्रभारी भूपेंदर सोनी ने सम्मान कार्यकर्म में एक माँ का प्यार कैसा होता है माँ कैसे अपनी बेटी को प्यार करती है।एक पल भी अगर बेटी माँ की आँखों से दुर हो जाती है तो कैसा महसूस होता है माँ को ।माँ शब्द् सबसे -सुन्दर शब्द है, इस शब्द में भावनाओं के कई इन्द्रधनुषी रंग हैं| माँ का प्यार ही जीवन का पहला प्यार होता है जो बिना किसी शर्त के आजीवन मिलता है| प्यार महसूस करने और फिर उसे जताने के सारे तरीके हर बच्चा अपनी माँ से ही सीखता है| आम तौर पर प्यार का नाम लेने पर प्रेमी-प्रेमिका की तस्वीर ही मन में उभरती है ऐसा ज्यादातर लोग अनजाने में समझते हैं मगर सच तो ये है कि प्यार का सबसे सुन्दरतम रूप माँ का प्यार है| सच्चाई ये है कि बिना किसी शर्त के प्यार करना और प्यार के सभी रूपों को पहचानना हर बच्चा अपनी माँ से ही सीखता है| माँ की संगति में महज आठ साल की उम्र में ही हर बच्चे के अन्दर एक लव मैप विकसित हो जाता है| उसी के आधार पर बच्चे की पसंद-नापसंद निर्भर करती है जैसे कि कुछ खास रंग, बातें, लोग, आवाज एवं वक्तित्व भी| हमारे जीवन में उसके प्यार के फूलों की खुशबू हर तरह के एहसासों से मन को हमेशा भिगोये रखती है| पिता का प्यार बच्चा दुनिया में आने के बाद महसूस करता है पर माँ का प्यार वो दुनियां में आने से पहले से ही महसूस करने लगता है| ऐसा सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि पशु पक्षी और जानवरों के साथ भी है| इसका कारण बच्चे का माँ के गर्भ में नौ महीने का समय है, इस दौरान उससे माँ के खाने, खून, सांसों, हार्मोन, गुस्सा, भावनाओं और आनंद आदि सभी बातों का साझा होना है| पूरे समय का साथ दोनों को आत्मीयता और प्यार के अटूट डोर में बांध देती है| ये प्यार हर बच्चे के लिए ईश्वरीय उपहार है, वहीँ पिता के प्यार से बच्चे को प्यार की कीमत पता चलती है और सुरक्षा की भावना दोनों के प्यार से महसूस करता है| माँ से प्यार करने पर उसे ऐसा महसूस होता है जैसे वो खुद से प्यार करता हो| पाषण युग में माँओं की भूमिका दोहरी होती थी, वो घर की जिम्मेदारी सँभालने के साथ ही पुरुषों के साथ शिकार पर भी जाती थी तब वह अपने बच्चे को पीठ पर बांधे रहती थी| रानी लक्ष्मी बाई जैसी वीरांगना माँ को कौन भूल सकता है जिसने बेटे को पीठ पर बांधे अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे| आज की कामकाजी महिलाएं भी दोहरी जम्मेदारी निभाती हैं| एक माँ वक्त पड़ने पर बच्चे को अकेले ही पाल लेती है उन्हें सुसंस्कृत, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाती हैं| माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ते की मजबूती की एक वजह औक्सिटोसीन नामक हार्मोन होता है जो बच्चे के जन्म के बाद माँ के अन्दर पैदा होता है| इसी हार्मोन के कारण माँ के अन्दर बच्चे को चिपकाने और बांहों में लेने की इच्छा होती है| बच्चे को सच्चे प्यार की अनुभूति असल में माँ के प्यार से ही होती है इसलिए हर बच्चा प्यार का ककहरा अपनी माँ से ही सीखता है| अपने हर कार्य को वो सबसे पहले माँ को ही दिखाता है| अक्सर बेटियां अपनी माँ का ही प्रतिरूप होती हैं| उनमे स्नेहिल व्यवहार और संबल के सही संतुलन का गुण माँ से ही मिलता है| अक्सर एक चंचल,  बेटियां शुरू से ही बच्चों से बहुत प्यार करती हैं ।पर आज जिस तरह आप गांव वासियो ने जो मुझे जुमेवारी सोंपी थी।की जसमीत को घर लेकर आना ही है।हम चाहे जहाँ भी रहे ,भूखे रहे प्यासे रहे यहाँ तक की हमारे जवानो ने एक टांग पर खड़े हो कर ट्रेन में सफर किया।लगातार मेरे नोजवान मेरे सम्पर्क में रहे।हालात बदलते रहे पर हम अपनी मंजिल पर आगे बढ़ते गए।मुझे पत्ता है माँ का दर्द कैसा होता है।मुझे हर वक़्त बस एक ही चिंता सता रही थी की ये मेरी ही बेटी है और मैंने इसको ढूंढना है और बेटी को माँ के साथ मिलाना है।मैं बधाई देना चाहता हु मेरे पुलिस नोजवानो व् मीडिया कर्मियो को जिन्होंने समय समय पर सम्पर्क किये रखा ।लोगो की भावनओं को समझते रहे।और अंत में आप सभी के सामने आप सब की खुश किस्मत जसमीत आप के सामने बैठी है।कार्यकर्म के अंत में श्री भूपेंदर सोनी व् उनके स्टाफ सदस्यो को मिलकर शाला स्टाफ व् सरपंच कुलदीप सिंह व् अन्य लोगो ने माला पहनाकर सम्मान किया।पर बेटे अक्सर जब वो खुद पिता बनते हैं तब बच्चों से ज्यादा प्यार करते हैं| और अंत में श्री सोनी ने सभी का आभार प्रकट कर ख़ुशी जताई व् कहा की हम सबके भीतर ईश्वरीय भक्ति सा माँ का प्यार हर पल महसूस होने वाला प्यार है, संसार के सभी प्यारे रिश्ते की नींव माँ का प्यार ही है|


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