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| बीकानेर जिले के नया शहर थाने की थानाधिकारी कविता पुनिया (फाइल फोटो) |
कुलदीप शर्मा, जर्नलिस्ट✍️🫡
कल अचानक बीकानेर जाना पड़ा। सोचा, कहाँ अचानक घूमें, तो पहुँच गया नया शहर थाने में। गया तो था परिवादी बनकर, लेकिन असल में इसलिए क्योंकि वहाँ सीआई कविता पुनिया हैं, जो मुझसे पहले से ही परिचित हैं। मन में ख्याल आया कि मुलाकात भी हो जाएगी।
लेकिन पहुँचते ही सारा प्लान धरा रह गया। कविता पुनिया एकदम गेट के सामने बनी गुमटी में बैठीं, परिवादियों को एक-एक करके गौर से सुन रही थीं। वहाँ जाकर बैठा, तो देखा कि वे हर शिकायत को ध्यान से समझ रही थीं। परिवादी संतुष्ट होकर लौट रहे थे। अचानक उन्होंने मुझे पहचान लिया और बोले, "कुलदीप, कैसे आना हुआ?" अब उन्हें कौन बताए कि हम तो मुलाकात करने ही आए थे, लेकिन सोचा कुछ खबर लायक बना लेंगे। सब प्लान फेल!
बीकानेर की धरती पर उतरा एक सपना,
नया शहर थाने की गुमटी में बसा,
कविता पुनिया की नजरों में न्याय का दीया,
परिवादियों के दर्द को छू लेती हर बारिया।
हम वहीं बैठे रहे। सीआई कविता पुनिया ने अपनी जन सुनवाई शुरू कर दी। हनुमानगढ़, भिरानी थाना, नोहर और महिला थाना में रह चुकीं हैं। उनकी खासियत यही है कि वे दबंग अधिकारी के रूप में जानी जाती हैं। हमेशा अपनी पुलिस टीम के लिए ढाल बनकर खड़ी रहती हैं। निडर, निष्पक्ष और साहसी—यही उनकी पहचान।
फिर उनके रीडर कौशल्या चौधरी से मुलाकात हुई। वो भी शानदार महिला हैं। महिलाओं और परिवादियों को सुनने में, मुकदमे की एबीसीडी लिखने में इनका गजब का जज्बा है। कविता पुनिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे जहाँ रहेंगी, अपनी शैली को बरकरार रखेंगी। न्याय की इस मिसाल ने दिल जीत लिया।
दबंग हौसले की मिसाल हैं कविता पुनिया,
रीडर कौशल्या संग चले न्याय का कारवाँ,
परिवादियों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी,
बीकानेर की शान, पुलिस की रानी बनी।
कविता पुनिया जैसी अधिकारी समाज के लिए प्रेरणा हैं। उनकी यह जन सुनवाई देखकर लगा कि सच्चा न्याय गुमटी से ही शुरू होता है।
श्वर आपको खूब तरक्की देवे
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