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| आईपीएस हरि शंकर (फाइल फोटो) |
कुलदीप शर्मा, जर्नलिस्ट✍️
हनुमानगढ़ जिले के एसपी आईपीएस हरि शंकर इन दिनों न आंखो में नींद की तृप्ति महसूस कर रहे हैं, न ही दिल में सुकून का अहसास। नेठराना गांव में मासूम अभिषेक शर्मा की निर्मम हत्या ने उनके मन को व्यथित कर दिया है। वह एक साधारण बच्चा था, जिसकी हंसी अब सन्नाटे में गूंज रही थी। अभिषेक के माता-पिता की आंखों में आंसू और गांव की सड़कों पर फैले सवाल हर पल आईपीएस हरि शंकर को कचोट रहे हैं। "हत्यारे कौन? न्याय कब मिलेगा?" ये प्रश्न उनके दिमाग में घूमते रहते हैं, जैसे कोई अनसुलझा पहेली जो रातों की नींद उड़ा देती है।
घर में जब माता-पिता आते हैं या रिश्तेदार पहुंचते हैं, तो हरि शंकर का चेहरा मुस्कुरा लेता है, लेकिन यह मुस्कान क्षणिक होती है। रात होते ही वे एसपी कार्यालय और गोगामेड़ी थाने के चक्कर लगाने लगते हैं। सारी रात जागकर फाइलें खंगालते हैं, सबूतों की पड़ताल करते हैं, और प्रत्येक प्रयास पर काम करते रहते हैं। हर पुलिसकर्मी को वे झोंक देते हैं – सीधे नेठराना मामले में। "यह सिर्फ केस नहीं, एक मासूम की पुकार है," वे टीम को समझाते हैं। मीटिंग रूम में चाय के कप ठंडे पड़ जाते हैं, लेकिन उनकी आंखों की चमक कम नहीं होती। वे मैप फैलाते हैं, गवाहों के बयान दोहराते हैं, और संभावित सुरागों पर माथा पीटते हैं।
हर मिस्ड कॉल को वापिस और साधारण से लेकर खास कॉल को उठाते है,बस इसी उम्मीद के साथ शायद कोई जानकारी देने वाला होगा। ऐसे आईपीएस अधिकारी कम ही मिलते हैं, जिन्होंने मामले को अपने दिल पर ले लिया हो। हरि शंकर के लिए यह केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत संकल्प बन चुका है। शुरू से ही न्याय की राह पर चलने वाले इस अधिकारी ने कभी हार नहीं मानी। नेठराना की धूल भरी सड़कों पर वे खुद उतरते हैं, ग्रामीणों से बात करते हैं, और रात के अंधेरे में भी छापेमारी का नेतृत्व करते हैं। उनकी थकान भरी आंखें बयां करती हैं कि नींद उनके लिए विलासिता बन चुकी है। परिवार की चिंता उन्हें सालती है – पत्नी की उदास नजरें, बच्चों की बेचैनी – लेकिन वे कहते हैं, "जब तक न्याय न मिले, सुकून नसीब नहीं।"
पूरी पुलिस टीम उनके इस जज्बे से प्रेरित है। वे कहते हैं, "हम हैं ना साहब!" टीम लीडर हारा तो पूरी पुलिस हारेगी। हर कांस्टेबल, हर इंस्पेक्टर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। गोगामेड़ी थाने की दीवारें गवाह हैं उन लंबी चर्चाओं की, जब वे रणनीति बनाते हैं। उम्मीद की किरण धीरे-धीरे उजागर हो रही है – एक सुराग मिला, एक गवाह ने कुछ बताया। एसपी साहब, आप नींद लें। आपका परिवार आपको चाहता है, हनुमानगढ़ की जनता आपके स्वास्थ्य की कामना करती है। नेठराना हत्याकांड जरूर खुल जाएगा। आपकी मेहनत रंग लाएगी, और अभिषेक को न्याय मिलेगा। वह दिन दूर नहीं जब हत्यारे जेल की सलाखों के पीछे होंगे, और आपके चेहरे पर सुकून की मुस्कान लौट आएगी।
ईश्वर आपकी और आपकी पुलिस टीम की मेहनत को जाया नहीं जाने दे, यही दुआ करते है! 🙏
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