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Friday, 21 September 2018

निजी एयर कम्पनियों की दादागिरी: हम तो ऐसे ही है बैठना हो बैठो हमें क्या!


भारत के एयर लाइन बिझनेस में निजी कम्पनियों की एंट्री के बाद आज प्रधानमंत्री मोदीजी के शब्दों में कहे तो हवाई चप्पल पहनेवाले भी विमानों में उड़ रहे है। अच्छा है। लेकिन क्या निजी कम्पनियों को मनमर्जिया करने की अनुमति देनी चाहिए? मामला जेट एयरवेज की मुंबई-जयपुर फ्लाईट में जो हुवा उसकी जितनी भर्त्सना की जाय उतनी कम है। विमान के स्टाफ वायुदाब नियंत्रित करना भूल गये। परिणाम स्वरुप कई यात्रियों के नाक और कान से खून बहने लगा। ५ यात्रियों के कान सुन्न पड गये। २५ मिनिट तक सभी यात्रियों को दहशत में बिताने पड़े। उस विमान के पायलट और स्टाफ द्वारा न तो यात्रियों को सही जानकारी दी गई न तो उनसे माफ़ी मांगी गई। इतना जरुर की कम्पनी ने खेद जताया। लेकिन वह पर्याप्त नहीं। स्टाफ और पायलट की भूल से 166 जिन्दगिया खतरे में थी। उनकी यह फर्ज है की उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुवा इसका मतलब यही है के निजी एयरलाइन्स कम्पनियों में अनुशासन की कमी है। ऐसा लगता है की निजी एयरलाइन्स कम्पनियो का पेट भर गया है। उन्हें अब यात्रियों की कोई चिंता फिकर नहीं।
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पिछले कुछ समय के निजी एयरलाइन्स कम्पनियों की खबरें देखे तो किसी का इंजिन हवा में बंद हो गया। किसी का टायर फट गया। किसी स्टाफ की गलती से 166 यात्री मरते मरते बचे। लेकिन इन्हें क्या? इन्हें तो मुनाफाखोरी करनी है। यात्री जाय भाड में। आखिर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेवारी कौन लेंगा? विमान में कोई यात्री गलती करे तो एयरलाइन्स उसके खिलाफ पुलिस कम्प्लेन करवाती है। ऐसा यात्री किसी भी विमान में यात्रा न करे ऐसा प्रावधान भी किया गया है। जेट एयरलाइन्स के जिस विमान में स्टाफ की गलती से 30 यात्रियों के नाक और कान से खून बहा उसके लिए कौन जिम्मेवार? क्या उन्हें मुआवजा देने की जिम्मेवारी निजी कम्पनी की नहीं बनती? जो एयर होस्टेस केबिन प्रेसर बटन दबाना भूल गई उसके खिलाफ, पायलट के खिलाफ और जेट एयरवेज़ कंपनीके खिलाफ क्रिमिनल नेग्लेजंसी की पुलिस फरियाद होनी चाहिए।

नए विमानों में कोई नियो इंजिन बिठाये गये है। लेकिन उसके रिपोट ठीक नहीं आ रहे। विमान हवा में हो तब यह नियो इंजिन फेल होने की घटनाए हो रही है। हालांकि दुसरे इंजिन से काम चलता है लेकिन यदि दूसरा इंजिन भी फेल हो गया तो क्या हो सकता है यह कहने की जरुरत नहीं। केंद्र सरकार के मंत्रीगण राजनितिक जवाब देने से समय निकल कर जिन एयरलाइन्स कम्पनियों के विमान में नये नियो इंजिन लगाए गये है उन सभी की जांच हो। हो सकता है की कुछ एयरलाइन्स जानबुछ कर इसकी जानकारी सरकार से छिपती हो। इससे पहले की ऐसे इन्जिनवाले वाला विमान उपरसे गिर कर नीचे आये यात्रियों की जानमाल की सुरक्षा के लिए उन सभी विमानों की सही सही जांच हो। जेट एयरवेज एयरलाइन्स उस कसूरवार स्टाफ के खिलाफ कब प्राथमिकी दर्ज करने जा रही है?
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