Report Exclusive, Corona Update: Latest News, Photos, and Videos on India corona update, Hindi News, Latest News in Hindi, Breaking News, हिन्दी समाचार -India दिल्ली.वाराणसी हाई स्पीड रेल काॅरिडोर के लिए जमीनी सर्वेक्षण ‘लीडार‘ तकनीक से होगा - Report Exclusive expr:class='data:blog.pageType'>

Report Exclusive - हर खबर में कुछ खास

Breaking

Tuesday, 8 December 2020

दिल्ली.वाराणसी हाई स्पीड रेल काॅरिडोर के लिए जमीनी सर्वेक्षण ‘लीडार‘ तकनीक से होगा

एनएचएसआरसीएल प्रवक्ता श्रीमती सुषमा गौड़ ने दी जानकारी

श्रीगंगानगर, 8 दिसम्बर। नेशनल हाई स्पीड रेल काॅर्पोरेशन लिमिटेड प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी एचएसआर काॅरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक हेलीकाप्टर पर घुड़सवार लेजर सक्षम उपकरणों का उपयोग करते हुए लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग सर्वे  ‘‘लीडार‘‘ तकनीक को अपनाएगा। कारपोरेशन की प्रवक्ता श्रीमती सुषमा गौड़ ने बताया कि संरेखण या जमीनी सर्वेक्षण किसी भी रैखिक अवसंरचना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण गतिविधि है क्योंकि सर्वेक्षण संरेखण के आसपास के क्षेत्रों का सटीक विवरण प्रदान करता है। यह तकनीक सटीक सर्वेक्षण डेटा देने के लिए लेजर डेटा, जीपीएस डेटा, उड़ान मापदंडों और वास्तविक तस्वीरों के संयोजन का उपयोग करती है। सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर, ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज संरेखण की संरचना, संरचनाएं, स्टेशनों और डिपो का स्थान, गलियारे के लिए भूमि की आवश्यकता, परियोजना प्रभावित भूखंडों /संरचनाओं की पहचान, राइट आॅफ वे आदि तय किए जाते हैं।
भारत में किसी भी रेलवे परियोजना के लिए पहली बार हवाई लीडार सर्वेक्षण तकनीक, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल काॅरिडोर के लिए मुख्य रूप से अपनी उच्च सटीकता के कारण अपनाया गया था। मुम्बइ-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल संरेखण के लिए एरियल लीडार का उपयोग करते हुए जमीनी सर्वेक्षण केवल 12 सप्ताह में किया गया। यदि यही कार्य पारंपरिक सर्वेक्षण विधियों के माध्यम से किया जाता तो 10-12 महीनों का समय लग जाता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, परियोजना की भयावहता और दिल्ली-वारणसी हाई स्पीड रेल काॅरिडोर डीवीएचएसआर गलियारे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समयसीमा का पालन करने के लिए, हवाई लीडार तकनीक का उपयोग करके जमीनी सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। जमीन पर संदर्भ बिंदु पहले ही चिह्नित किए जा चुके हैं और एक हेलीकाॅप्टर पर लगे उपकरणों के माध्यम से डेटा संग्रह चरणबद्ध तरीके से 13 दिसंबर 2020 (मौसम की स्थिति के आधार पर) से शुरू होगा। हेलीकाॅप्टर को उड़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय से अपेक्षित अनुमति मिल गई है और विमान और उपकरणों का निरीक्षण चल रहा है।
प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी काॅरिडोर संरेखण में घनी आबादी वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों, राजमार्ग, सड़क, घाट, नदियाँ, हरे-भरे खेत आदि शामिल हैं, जो इस गतिविधि को और अधिक चुनौतीपूर्ण बनाता है। कार्पोरेशन को रेल मंत्रालय द्वारा दिल्ली-वाराणसी  काॅरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया है। काॅरिडोर की अस्थायी लंबाई लगभग 800 किमी है, संरेखण और स्टेशनों को सरकार के परामर्श से तय किया जाएगा।

No comments:

Post a Comment

इस खबर को लेकर अपनी क्या प्रतिक्रिया हैं खुल कर लिखे ताकि पाठको को कुछ संदेश जाए । कृपया अपने शब्दों की गरिमा भी बनाये रखे ।

कमेंट करे