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| बीकानेर जिला शहर कोतवाली थानाधिकारी सविता डाल (फाइल फोटो) |
कुलदीप शर्मा, जर्नलिस्ट ✍️
सीआई सविता डाल – नाम ही काफी है जज्बे को जगाने के लिए। बीकानेर कोतवाल की ड्यूटी संभालते हुए ऊपर से एक मां का दायित्व। साढ़े चार साल की नन्ही बच्ची की ममता भरी जिम्मेदारी। फिर भी, सारी-सारी रात ड्यूटी पर मुस्तैद, गश्त के लिए हमेशा तैयार।
जब जिम्मेदारियां आती हैं, तो सविता जैसी योद्धा नींद को भी भूल जाती हैं!
हनुमानगढ़ में पहली बार महिला थाना प्रभारी बनीं। चेहरे पर थोड़ा-सा डर और भय झलकता था – नई जिम्मेदारी का पहला कदम, नई चुनौतियां। लेकिन वो डर बस शुरुआती छाया था। आज जब काफी समय बाद उनसे बीकानेर के कोतवाली थाने में मुलाकात हुई। बीकानेर कोतवाल के रूप में चेहरे पर वो चमक है, जो जिम्मेदारी की आग से तपकर निकली है।
डर को पीछे छोड़, सविता ने साबित कर दिया – महिला अधिकारी का मतलब सिर्फ ड्यूटी नहीं, डटकर सामना करना है!
मैं थाने में करीब एक घंटा रहा। इस दौरान सीआई सविता डाल मुझे छोड़कर चार बार गईं – हर बार लौटकर बोलीं, "सॉरी कुलदीप जी, आपको समय नहीं दे पा रही।" लेकिन वो सॉरी में छिपी थी उनकी भागदौड़ की मिसाल। ड्यूटी के प्रति वो समर्पण, वो तत्परता – जैसे थाना ही उनका परिवार हो। बच्ची की मां से लेकर अपराधियों की धर दबोचने वाली अफसर तक, सविता ने सब संभाला।
सॉरी कहना आसान है, लेकिन ड्यूटी को प्राथमिकता देना – यही बनाता है सविता को लोहा मानने वाली शेरनी!
अंत में यही कहूंगा – वो हनुमानगढ़ वाली सविता अब नहीं रहीं। तीन तारों की चमक के बाद मजबूत, निडर अफसर बन चुकी हैं। राजस्थान पुलिस की ड्यूटी गाथा में सविता डाल का नाम अब मजबूत अक्षरों में लिखा जाएगा।
सविता ने साबित किया – तारे जितने बढ़ें, जज्बा उतना ही चमके!
ईश्वर आपको खूब तरक्की देवे

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