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Monday, 22 March 2021

डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाली प्रथम महिला का एसकेडी विश्वविद्यालय ने किया सम्मान



डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाली प्रथम महिला का एसकेडी विश्वविद्यालय ने किया सम्मान

पिता ने बेटी तो बेटी ने पिता को बताया असली हीरो

डॉक्टर नजमा बानो बोली खुली आँखों से सपना ले छात्राएं

विश्वविद्यालय वीसी बोले शिक्षा अब महत्वपूर्ण 

हनुमानगढ़|(कुलदीप शर्मा)  श्री खुशालदास विश्वविद्यालय प्रांगण में सोमवार 22 मार्च को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अल्पसंख्यक समुदाय - राठ समाज के आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश विषय पर शोध कर डॉक्टर की उपाधि लेने वाली प्रथम हनुमानगढ़ महिला डॉक्टर नजमा बानो से जुड़ा था। दरअसल डॉक्टर नजमा बानो ने हाल ही में राठ समाज पर शोध करते हुए डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एसकेडी विश्वविद्यालय ने डॉक्टर नजमा बानो को समाज मे महिलाओं की शिक्षा को लेकर रोल मॉडल मानते हुए डॉक्टर नजमा बानो के सम्मान में कार्यक्रम का आयोजन करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय की तरफ से सम्मानित किया गया। 


डॉक्टर नजमा बोली सपने खुली आँखों से देखे

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डॉक्टरेट की उपाधि मिलने पर सम्मानित होते हुए नजमा ने श्री खुशालदास विश्वविद्यालय में आये मेहमानों और बच्चों को शिक्षा के प्रति ईमानदार होने पर जोर देने की बात कही। उन्होंने जैसे ही छात्र-छात्राओं को सपने खुली आँखों से देखने को कहा तो कार्यक्रम स्थल तालियों से गूंज उठा। डॉक्टर नजमा खातून ने बताया कि उनकी शिक्षा उनके पिता के आशीर्वाद से शुरू हुई जिसे मेने निकाह के बाद भी परिवार के हौंसले के साथ जारी रखा और आज वो दिन भी आ गया जब मैने डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल कर ली। अंत मे डॉक्टर नजमा बानो ने एसकेडी विश्वविद्यालय को सम्मान के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि एसकेडी विश्वविद्यालय अपने आप मे बहुत बड़ी संस्था है। जहां शिक्षा के साथ संस्कार भी सिखाये जाते है।


पिता की नम आंखों ने सबको रुलाया

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डॉक्टरेट की उपाधि पाने पर डॉक्टर नजमा बानो के पिता मोहम्मद मुश्ताक जोइया को जब मंच पर सम्बोधन के लिए  बुलाया गया तो उनका गला बार-बार रुक रहा था। उनकी आवाज गले से बाहर निकलने से पहले की कम्पन्न साफ सुनाई दे रही थी। उनकी आंखों में हल्के-हल्के आंसू छलकने लगे थे उनकी बातों को सुनकर हर कोई अपने आप को गौरवान्वित तो अनुभव कर ही रहा था साथ ही सभी की आंखे नम होने पर भी मजबूर कर रहा था। उन्होंने कहा कि हमारे समाज मे शिक्षा की तरफ रुझान कम था और शादी के बाद तो पढना बिल्कुल भी नहीं होता है। लेकिन बेटी नजमा ने हिम्मत व होंसले से पहले हमारा दिल जीता और बाद में ससुराल पक्ष का भी दिल जितने में कामयाब रही। उसी का परिणाम है कि आज मेरी बेटी आपके सामने डॉक्टर की उपाधि ले चुकी है। पिता जोइया ने सभी छात्र-छात्राओं को कहा कि अगर दिल मे चाहत हो तो कुछ भी किया जा सकता है। 


विश्वविद्यालय को प्रथम स्थान मिलना भी बना चर्चा


एसकेडी विश्वविद्यालय को एसओचेम संस्था द्वारा प्रथम पुरुष्कार मिलना भी आज के कार्यक्रम में चर्चा का विषय रहा. जानकारी के अनुसार एसओचेम एक औधोगिक संस्था है जो की समय-समय पर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाली संस्थाओ को प्रत्येक वर्ष चयनित करके पुरस्कारित करती रहती है. एसओचेम संस्था में 86 संस्थाओ को टक्कर देते हुए एसकेडी विश्वविद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ प्रत्येक राहगीरों के लिए विश्रामालय और ठंडे पेयजल व्यवस्था की अनूठी पहल पेशकश के चलते मणिपाल विश्वविद्यालय को पछाड़कर प्रथम स्थान प्राप्त किया था. वहीं विश्वविद्यालय प्रशासक सी एस राघव ने बताया की इसी के चलते अब ग्रीनरी इको फ्रेंडली की सविंदा भी विश्वविद्यालय के साथ हो गयी है. विश्वविद्यालय प्रशासक सी एस राघव ने बताया की इस संविदा से क्षेत्र में पर्यायवरण भी साफ़-सुथरा रहेगा।


मुख्य अतिथियों ने बांधा समा

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सोमवार को श्री खुशालदास विश्वविद्यालय परिसर के हुए कार्यक्रम में आये सभी मुख्य अतिथियों ने अपने-अपने वक्तव्य से मानो समा ही बांध दिया हो। विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. डॉक्टर एस के दास ने कहा कि अब शिक्षा जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है। विश्वविद्यालय आज खुद को डॉक्टर नजमा बानो को सम्मानित करते हुए गर्व महसूस कर रहा है। अधिवक्ता दिनेश दाधीच ने कहा कि एसकेडी विश्वविद्यालय अपने-आप मे वो संस्था है जो समाज को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी बांटती है। पत्रकार गोपाल झा ने अपने सम्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय में हम पढ़ने नहीं कुछ सीखने आते है। यहां से हर व्यक्ति सिद्धान्त व व्यवहारिक ज्ञान भी अर्जित करता है। उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाली नजमा को बधाई देते हुए कहा कि ये हमारे लिए एक रोल मॉडल की तरह ही है। उन्होंने इस बात की भी चिंता जताई कि पीएचडी के शोध पत्र को फिर कचरा बना दिया जाता है। अगर उसके शोध को जनता के बीच रखा जाए तो बहुत कुछ सीखने को मिलता है। समाजसेवक भीष्म कौशिक ने अपने सम्बोधन में कहा कि माँ-बाप की वजह से आपकी पहचान होती है। अगर बच्चो की वजह से माता-पिता की पहचान हो तो कितना गौरव का पल होता है। ऐसा ही डॉक्टर नजमा ने उदारहण प्रस्तुत किया है। सरपंच जगतार सिंह ने भी सम्बोधन में एसकेडी विश्वविद्यालय के इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए डॉक्टर नजमा को बधाई दी। प्रो.वी सी रामावतार मीणा ने कहा कि नजमा की बुद्धि व समझ से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। डॉक्टर नजमा के जीवन से हमे बहुत कुछ सीखना भी चाहिए।


विश्वविद्यालय ने इनको किया सम्मानित

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कार्यक्रम में मंच संचालन डॉक्टर बृजलाल शर्मा ने किया। कार्यक्रम के अंत मे डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाली डॉक्टर नजमा को विश्वविद्यालय के वी सी एस के दास, डॉक्टर अर्चना तंवर, अनु पुनिया और डॉक्टर रचना शर्मा ने शॉल ओढ़ाकर व सम्मान प्रतीक देकर समानित किया गया। उसी के साथ सभी विशिष्ट अतिथियों मोहम्मद मुश्ताक जोइया, अधिवक्ता दिनेश दाधीच, पत्रकार गोपाल झा, पत्रकार देवेंद्र शर्मा, समाजसेवी भीष्म कौशिक, सरपंच जगतार सिंह, बाला खान डबली मौलवी वास को स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया।


ये रहे मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर नजमा खातून ने शिरकत की वहीं अगर विशिष्ट अतिथियों के रूप में मोहम्मद मुश्ताक जोइया, अधिवक्ता दिनेश दाधीच, पत्रकार गोपाल झा, समाजसेवी भीष्म कौशिक, पत्रकार देवेन्द्र शर्मा, जगतार सिंह सरपंच डबली वास कुतुब ओर कुलपति प्रो. डॉक्टर एस के, बाला खान डबली मौलवी वास रहे।




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