नेशनल। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सूचना के अधिकार के तहत सिविल सेवा परीक्षा के अंकों का विवरण नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने 5 वर्ष पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए उस फैसले को पलट दिया है जिसमें कहा था कि आरटीआई के तहत संघ लोक सेवा आयोग को सिविल सेवा परीक्षा(प्रारंभिक) के अंकों का विवरण सार्वजनिक किया जा सकता है।
राजीव सिन्हा ने कहा, 'ऐसें में हमारा मानना है सिविल सेवा परीक्षा के अंकों का विवरण सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है।' पीठ ने यूपीएससी की इस दलील को स्वीकार किया कि अंकों का विवरण देने से बेवजह असंतोष होगा, मुकदमे दायर होंगे, मूल्यांकनकर्ता की पहचान बतानी होगी जिससे सिस्टम की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि अंकों के खुलासे से आकलन प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही ऐसा करने से सिस्टम की प्रतिष्ठता के साथ समझौता करना पड़ सकता है। पीठ ने कहा कि जहां एक तरह पारदर्शिता है तो वहीं दूसरी ओर गंभीर जानकारियों को गुप्त रखना है।

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