चार पांवों वाले रहस्य से क्यों डर रहे हैं एक खास पहनावे वाले ?

हनुमानगढ़ पुलिस में एक बार फिर चर्चा में कुत्ते
पुलिस में एक बार फिर चर्चा में एक चार पैरों वाला!


कभी-कभी जीवन के रंगीन पर्दे पर कुछ दृश्य ऐसे उभर आते हैं, जिन्हें साधारण दर्शक यदि गौर से देखे, तो समझना आसान हो जाए — पर इशारे वही हैं, जो आँखों से गुजर जाएं और दिमाग में हलचल मचा दें।  



आखिर क्या है यह? एक छोटा सा साथी, जो अक्सर सड़क किनारे अपने नन्हे पाँवों पर धूप सेंकता है, इन दिनों काफी चर्चा में रहा। किसी अनजाने सा संवाद हो गया — न कोई आवाज, न कोई शोर, लेकिन एक छड़ी की हल्के अहसास ने दिन की चुप्पी में हलचल पैदा कर दी। सीधी बात तो कोई करता नहीं, सब मुँह फेर लेते हैं, पर दरअसल पिक्चर की असली कहानी कैमरे की आँख में कैद हो गई। ऐसा ही एक किस्सा हुआ, जिससे अब हर दीवार पर फुसफुसाहटें गूंज रही हैं।  

फिर, आसपास के बड़े-बड़े दरवाजों के अंदर हलचल हुई; कुछ छायाएँ सहम उठीं, क्योंकि पहले भी ऐसे मामले में गलियों के फैसले बड़े दिलचस्प रहे। कार्यालयों में फाइलें कम, फुसफुसाहटें अधिक चल रही हैं—माना जा रहा है कि पिछली बार जब कुछ ‘भौंकने’ जैसा हुआ था, तो कई बिना सितारे और सितारे वाले कंधो को नुकसान उठाना पड़ा था। अब वो वर्दी वाले सड़क पर किसी भी पूंछ हिलाते चार पैर वालो को दूर से देखकर कर ही साइड हो जाते है। आखिर सावधानी ही तो सबसे बड़ी बहादुरी है, चाहे सामने इंसान हो या इंसान का सबसे पुराना मित्र।

अब तो लगता है, कोई भी अपने राज खुल कर नहीं रखना चाहता — सबकी चाल धीमी, बातों में ठहराव है। इस बार गरीबों से ज्यादा अमीरों की चिंता है कि किस गलती पर किसका पर्दा गिर जाए।

सावधानी का आलम यह है कि अब कोई कहीं घूमता-फिरता यदि चार पैरों वाले से टकरा जाए, तो उसकी चाल बदल जाए, उसकी नजर नीचे। सबको यही डर है — कहीं फिर कोई विचित्र वीडियो न उभर आये, और फिर सबको अपने खोए हुए पत्ते गिनने पड़ जाएँ। मोहल्ले के बुज़ुर्ग तो कहते-बोलते नहीं, बस आंखों से समझा देते हैं कि "इस बार गलती का ठीकरा किसी के सिर न फूटे।"

सोशल चौराहों पर अब चर्चाएं, तुकबंदी और कहावतों का मजमा लगा है — “जिसे अपनी टांगों पर भरोसा है, वही आगे बढ़े; वरना हर किसी के लिए खामोशी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।” सत्य यही है, कि गलियों में हलचल है, लेकिन पहचान कोई नहीं। कहानी में सब पात्र हैं, पर नाम किसी का नहीं।

(कुलदीप शर्मा, जर्नलिस्ट)

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